मैं इस कारण आया हूँ , क्योंकि मैं चर्च में चोरी करता था।
आईये हम प्रभु के पवित्रशास्त्र में से मत्ती 10:28 वचन पढ़े।
जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, तो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।
जैसे ही एक आत्मा नरक में प्रवेश होती है, वह व्यक्ति एक शरीर जो मृत्यु का शरीर कहलाता है, प्राप्तं करता है। प्रभु यीशु ने मेरे हाथ को थामा और हम ने एक बहुत ही अन्धेरी और अत्यन्त गहरी खाई की मानिन्द सुरंग में नीचे की ओर जाना शुरू किया। इस सुरंग से होकर हम पृथ्वी के केन्द्र की ओर बढने लगे। हम एक ऐसे स्थान पर पहुँचे जहाँ भीतर प्रवेश करने के लिये अनेक द्वार थे, उन द्वारों से एक द्वार खुला और प्रभु सहित हमने उस द्वार से भीतर प्रवेश किया। मैं प्रभु के हाथ को छोड़ना नहीं चाहता था, क्योंकि में जानता था कि यदि मैंने ऐसा किया होता, तो मुझे हमेशा के लिये नरक में ही रहना पड़ता।
हमने द्वार से भीतर प्रवेश किया और जो पहली चीज़ मैंने देखी वह एक विशालतम दीवार थी जहाँ हजारों लोग हुकों पर लटकाये गये थे, उनके सिर हुकों में फंसे हुए थे। उनके हाथ बेड़ियों में फंसे हुए दीवारों में लगे हुए थे। हम ने वहाँ हर कहीं हजारों हजार व्यक्तियों को आग की ज्वालाओं में भी खड़े हुए देखा। हम चलते ही रहे तब उन तमाम ज्वालाओं में से एक के सामने जाकर खड़े हुए और हम धीरे-धीरे नीचे की ओर जाने लगे। तब मैं वहाँ एक व्यक्ति को देख सका। जब उस व्यक्ति ने बोलना शुरू किया जब मैंने पहचाना कि वह एक आदमी था। इस आदमी ने याजक का वस्त्र पहन रखा था और वे वस्त्र पूर्णत मैले कुचैले चिथड़ों की मानिन्द थे।
इस आदमी के शरीर के चारो तरफ केंचुए फिसलते हुए भीतर प्रवेश कर रहे थे और बाहर आ रहे थे। उसका शरीर अग्नि द्वारा जलने से काला होकर दिखाई पड़ रहा था। उसकी आँखें नोंच कर निकाल दी गयी थीं और शरीर का माँस पिघलकर भूमि की ओर बूंद-बूंद करके टपक रहा था। सारा शरीर इसी तरह गिर जाने के बाद पुनः मांस शरीर में भरकर यही क्रिया दोबारा होने लगती यही क्रम लगातार जारी था।
जब उस आदमी ने यीशु को देखा उसने कहा, "प्रभु, मुझ पर दया कीजिये, मुझ पर दया कीजिये। कृपया मुझे यहाँ से एक क्षण के लिये बाहर आने दीजिये। केवल एक मिनट"। इस आदमी के सीने पर एक धातुई प्लेट लगी हुई थी, जिस पर लिखी हुई पंक्तियाँ कह रहीं थीं, "मैं लुटेरा हूँ इसीलिये यहाँ हूँ"। जब यीशु पास आये, उन्होंने इस आदमी से पूछा, "तुम्हारा नाम क्या है?" आदमी ने जवाब दिया, "मेरा नाम एन्ड्रयू है, प्रभु।" प्रभु ने उससे पूछा, "तुम यहाँ कितने समय से हो?" एन्ड्रयू ने उत्तर दिया, "मैं यहाँ पर एक लम्बे समय से हूँ"।
उस आदमी ने अपनी कहानी बताना प्रारम्भ किया। उसने कहा कि उसको कैथोलिक चर्च में उसके पास दशमांश (सदस्यों से उनकी कमाई का दसवाँ हिस्सा जैसा कि पवित्रशास्त्र बाइबिल देने को बताती है) जमा करने वाले गरीबों को आर्थिक सहायता बाँटने की जिम्मेदारी थी। बाँटने के बदले वह किसी तरह से भी धन की चोरी करता था। तब प्रभु की आँखें, तरस से भर गयीं, और उस आदमी से उन्होंने पूछा, "एन्ड्रयू, क्या तुमने कभी सुसमाचार सुना था?" और एन्ड्रयू ने उत्तर दिया "हाँ, प्रभु वहाँ एक मसीही महिला थी जो चर्च जाती थी और उसने एक बार सुसमाचार प्रचार किया, परन्तु मैं इसे ग्रहण करना नहीं चाहता था। मैं इस पर विश्वास करना नहीं चाहता था, परन्तु मैं इस पर अब विश्वास करता हूँ। अभी मैं, यह विश्वास करता हूँ कि यह सत्य है। कृपया प्रभु जी मुझे यहाँ से बाहर निकालिये, कम से कम एक क्षण के लिये ही"।
जब वह यह कर ही रहा था, केंचुए उसकी आँखों के छेदों में रेंगने लगे, कानों से वे केंचुए बाहर आ रहे थे और मुंह के द्वारा फिर भीतर चले गये। उसने अपने हाथों से निकाल फेंकना चाहा परन्तु यह असम्भव ही था। एन्ड्रयू दुःख से कहरते हुए चिल्ला रहा था, और बारम्बार परमेश्वर से दया मांग रहा था। उसने यीशु से पूछना जारी रखा कि वे उस स्थान से बाहर निकालें। स्थिति को और बदतर बनाने के लिये पिशाचों ने अपने भालों से चुभा चुभाकर उसे लगातार भयानक प्रताड़ना देते रहे।
ये पिशाच कुछ खिलौनों की तरह, दिखाई दे रहे थे जिन्हें हम यहाँ पृथ्वी पर "जॉर्डनस" पुकारते हैं। मैंने उन खिलौनों को नरक में देखा, परन्तु वे किसी भी तरह खिलौने नहीं कहे जा सकते: वे जिन्दा थे और वे पैशाचिक थे। वे लगभग तीन तीन फीट ऊंचे थे और उनके दांत बहुत ही तेज थे। उनके मुहों से लहू टपक रहा था और उनकी आँखें पूरी लाल थीं। वे पूरी ताकत से एन्ड्रयू को आघात पहुँचा रहे थे, करीब-करीब वे सभी जो नरक के उस हिस्से में थे वे सभी इसमें शामिल थे।
"मैं ऐसे व्यभिचार के कारण यहाँ हूँ,
प्रभु मुझे आगे चलाते रहे। मैंने वहीं हजारों लोगों को पीड़ा में पड़े देखा। हर समय वे आत्माएँ प्रभु को देखती थीं, वे उस के पास पहुंचने की कोशिश करती थीं, उन्होंने अपने दुर्बल हाथों को प्रभु की ओर बढ़ाया। तब मेरा ध्यान एक औरत की तरफ गया, जब उसने प्रभु को देखा वह चिल्लाने लगी। उसने चीखते हुए प्रभु से याचना की "प्रभु कृपया मुझ पर दया कीजिए। मुझे इस स्थान से बाहर निकालिये"। यह औरत भयानक कष्ट में थी और उसके प्रभु की ओर अपने हाथों को फैलाया। वह उससे माँगती रही कि कम से कम एक सेकण्ड के लिये प्रभु उसे बाहर निकालें।
यह औरत पूरी तरह वस्त्र विहीन थी और पूरा शरीर कीचड़ से लथपथ था। उसके बाल गूंथे थे और केंचुए उसके शरीर पर ऊपर नीचे रंग-रेंग कर चल रहे थे। उसने उन केंचुओं को हाथों से पकड़कर फेंकने की चेष्टा की, परन्तु प्रत्येक बार उस औरत ने उन्हें बटोरकर अलग किया परन्तु वे अधिकाधिक बढ़ते चले गये। ये केंचुए छः से आठ इंच तक लम्बे थे। प्रभु का वचन मरकुस नौवे अध्याय के चवालीसवें वचन में कहता है, जब वे केंचुए उस औरत का मांस बहुत तेजी से झपट कर खाने लगे तब उसकी चीख सुनना और उसे देखना बहुत ही भयानक था। उसकी छाती पर भी एक धातुई प्लेट लगी हुई थी जो आग से भी नष्ट न हो सकी थी।
उस प्लेट ने कहा, "मैं ऐसे व्यभिचार के कारण यहाँ हूँ, जो अविवाहित पुरूष और स्त्री में होता है या वे स्त्री पुरूष जो आपस में विवाहित नहीं हैं और शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं"। बिलकुल ठीक इसी तरह, इस औरत को नरक में एक घृणित और मोटे सर्प के साथ व्यभिचार करना पड़ा था। इस सर्प के शरीर पर चारों ओर छः इंच से आउ इंच लम्बे विशाल काँटे थे। यह सर्प शीघ्रता से उस औरत के गुप्त अंग में प्रवेश करके गहराई में बढ़ गया और उसके शरीर के अन्दर चलता हुआ उसके गले तक पहुंच गया।
जब यह सर्प उस औरत के शरीर में प्रविष्ट हुआ, वह खौफनाक आवाजें करने लगी, और भी प्रबलता से उस स्थान से बाहर निकाले जाने के लिये प्रभु से प्रार्थना करने लगी। उसने प्रभु से कहा, "प्रभु मैं व्यभिचार (अविवाहितों का व्यभिचार अथवा विवाह किये बिना स्त्री पुरूष का व्यभिचार) के कारण यहाँ हूँ। मैं एड्स के कारण मर गयी थी, तब ही से मैं यहाँ सात वर्षों से हूँ। मेरे छः प्रेमी थे, और मैं व्यभिचार के कारण यहाँ हूँ"। वहाँ नरक में उसे उस सर्प के साथ बार-बार ही सब करना पड़ा। दिन और रात उसे विश्राम नहीं था। इस औरत ने अपने हाथों को प्रभु की ओर फैलाने की कोशिश की परन्तु प्रभु ने उससे केवल यह बताया, "ब्लान्का, तुम्हारे लिये अब बहुत देर हो चुकी है। कीड़े तुम्हारा बिछौना होंगे और केंचुए तुम्हें ढंक लेंगे"। जब प्रभु ने वे वचन कहे, एक अग्नि आवरण ने उसे ढक लिया, और मैं उसे फिर से न देख सका।
दशमांश और भेंट न देने के कारण नर्क में.
हम लगातार चलते और चलते ही रहे और देख रहे थे कि उस स्थान में हज़ारों और हजारों लोग थे। हम एक स्थान में रूके। यह एक अग्निमय तैराकी स्थल की तरह दिखाई दे रहा था और वहाँ उस तैरने के स्थान के अन्दर हज़ारों स्त्री और पुरूष थे। उस सभी के छाती पर एक-एक धातुई प्लेट लगी हई थी, जो यह कहती थी, "मैं दशमांश और भैंर्ट न देने के कारण यहाँ हूँ"।
जब मैंने यह देखा मैंने प्रभु से पूछा, "यह कैसे सम्भव हो सकता है? वे लोग इस कारण से यहाँ हैं?"। प्रभु ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "हाँ, क्योंकि ये लोग सोचते थे कि दशमांश और भेंटें देना जरूरी नहीं थे, जबकि मेरा वचन प्रकट करता है कि यह मेरी आज्ञा है..." मालाकी की पुस्तक में, तीसरे अध्याय के आठवें और नौवें वचन में वर्णन किया गया है, "क्या मनुष्य परमेश्वर को धोखा दे सकता है? देखो तुम मुझ को धोखा देते हो, और तौभी पूछते हो कि हम ने किस बात में तुझे लूटा है? दशमांश और उठाने की भेंटों में। तुम पर भारी शाप पड़ा है, क्योंकि तुम मुझे लूटते हो; वरन् सारी जाति ऐसा करती है"।
प्रभु ने मुझे यह भी बताया, कि जब उसके लोग दशमांश देना रोक देते हैं, परमेश्वर के काम धीमें हो जाते और रूक जाते हैं, और सुसमाचार फिर प्रचार नहीं किया जा सकता है। उस स्थान पर रखे हुए लोग नरक के अन्य स्थानों में रखे हुए मनुष्यों की तुलना में हजार गुणा अधिक कष्ट पाते हैं क्योंकि वे प्रभु के वचन को जानते थे और उसका पालन नहीं किया।
हम लगातार चलते रहे और प्रभु ने मुझे एक आदमी को देखने के लिये अनुमति दिया, उसकी कमर से सिर तक का हिस्सा। और तब मुझे दर्शन में यह दिखना शुरू हो गया कि वह आदमी पृथ्वी पर जब था तब कैसे मरा। उसका नाम रोगेलिया था, और वह व्यक्ति अपनी कार में था। एक व्यक्ति उसे सुसमाचार बताने निकट आया, और रोगेलियो को एक पवित्रशास्त्र दिया, परन्तु उसने दृष्टि फेर कर, लेने से इन्कार किया और उस प्रचारक की चितानियों को नजर अन्दाज करते हुए लगातार अपने ही मार्ग पर चलता रहा। वह यह नहीं जानता था कि कुछ ही मिनटों के पश्चात् उसकी कार दुर्घटना ग्रस्त होने वाली है और एक सीधी चट्टान पर गिरेगी और उसकी मृत्यु हो जाएगी। जिस क्षण उसकी कार की दुर्घटना हुई, बाइबिल जो रखी थी उसका प्रकाशितवाक्य इक्कीस अध्याय का आठवाँ वचन खुला था, जो यह कहता है, "पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्ति पूजकों, और सब झूटों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है; यह दूसरी मृत्यु है"।
जब रोगेलियों ने बाइबिल के इस हिस्से को पढ़ा, वह मरा और नरक में पहुँचा। उसे वहाँ पहुँचकर एक माह ही हुआ था और उसके चेहरे पर अभी भी कुछ मांस बाकी था। किसी भी तरह वह भी औरों की तरह ही कष्ट उठा रहा था। पहिले वह नहीं जानता था कि वह वहाँ क्यों है, इसलिये मैं सोचता हूँ कि जब वह मसीही उसकी कार के करीब आया था उसके लिये केवल वही एक और अंतिम मौका था, कि वह प्रभु यीशु को ग्रहण कर लेता, इसी तरह कईयों ने यह मौका खो दिया कि उसे (प्रभु को) ग्रहण कर लेते।
आज मैं आपको आमंत्रित करता हूँ, कि आप यीशु के लिये अपने हृदय खोलें। केवल एक वही मार्ग, सत्य और जीवन है और उसके द्वारा ही हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। परमेश्वर हमें भी पवित्रता और आदर में उसके मार्गों का अनुसरण करने के लिये बुलाता है। परमेश्वर आपको आशीष दे। Read More...



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