यीशु द्वारा क्रूस पर कहे गये अंतिम सात वचन - The Seven Last Words of Jesus on the Cross
1 "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहें हैं?" लूका 23:33-37
33 जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुँचे, तो उन्होंने वहाँ उसे और उन कुकर्मियों को भी एक को दाहिनी और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया।
34 तब यीशु ने कहा, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहें हैं?" और उन्होंने चिट्ठियों डालकर उसके कपड़े बाँट लिए। 1पत 3:9 यशा 53:12. भजन 22:18)
35 लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठटट्ठा कर करके कहते थे कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। भजन) 22:7)
36 सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा करके कहते थे। भजन) 69:21)
37 यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा "
38 और उसके ऊपर एक दोषपत्र भी लगा था: “यह यहूदियों का राजा है।”
यूहन्ना 19:18 वहाँ उन्होंने उसे (यीशु और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को।
लूका 23:39-43 जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उनमें से एक ने उसकी निन्दा करके कहा, "क्या तू मसीह नहीं? तो फिर अपने आप को और हमें बचा"
28 इसके बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है; इसलिए कि पवित्रशास्त्र की बात पूरी हो कहा, “मैं प्यासा हूँ।”
31 और इसलिए कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पिलातुस से विनती की, कि उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ ताकि सब्त के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्योंकि वह सब्त का दिन बड़ा दिन था। (मर. 15: 42, व्यव. 21:22,23)
44 और लगभग दोपहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अंधियारा छाया रहा,
35 लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठटट्ठा कर करके कहते थे कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। भजन) 22:7)
36 सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा करके कहते थे। भजन) 69:21)
37 यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा "
38 और उसके ऊपर एक दोषपत्र भी लगा था: “यह यहूदियों का राजा है।”
2 "मै तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।", यूहन्ना 19:18 लूका 23:39-43
यूहन्ना 19:18 वहाँ उन्होंने उसे (यीशु और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को।
लूका 23:39-43 जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उनमें से एक ने उसकी निन्दा करके कहा, "क्या तू मसीह नहीं? तो फिर अपने आप को और हमें बचा"
40 इस पर दूसरे ने उसे डाँटकर कहा, “क्या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्ड पा रहा है,
41 और हम तो न्यायानुसार दण्ड पा रहे हैं, क्योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं। पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।"
42 तब उसने कहा, "हे यीशु जब तू अपने राज्य में आए तो मेरी सुधि लेना"
43 उसने उससे कहा, "मै तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।"
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Read More: ज्यादा बाइबल अध्ययन के लिए क्लिक करें:3 "हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।" तब उस चेले से कहा, "यह तेरी माता है। यूहन्ना 19:25-27
25 सो सिपाहियों ने ऐसा ही किया परन्तु यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहिन मरियम, क्लोपास की पत्नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी। 26 यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा, "हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।"
27 तब उस चेले से कहा, "यह तेरी माता है और उसी समय से वह चेला उसे अपने घर ले गया।
4 "एली, एली, लमा शबक्तनी?" अर्थात् "हे मेरे परमेश्वर हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?", मती 27:45-56
45 दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अंधेरा छाया रहा। 46 तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, “एली, एली, लमा शबक्तनी?” अर्थात् “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?”
47 जो वहाँ खड़े थे, उनमें से कितनों ने यह सुनकर कहा, “वह तो एलिय्याह को पुकारता है।”
48 उनमें से एक तुरन्त दौड़ा, और पनसोख्ता लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्डे पर रखकर उसे चुसाया।
49 औरों ने कहा, “रह जाओ, देखें, एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं।”
50 तब यीशु ने फिर बड़े शब्द से चिल्लाकर प्राण छोड़ दिए।
51 तब, मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया: और धरती डोल गई और चट्टानें फट गईं।
52 और कब्रें खुल गईं, और सोए हुए पवित्र लोगों के बहुत शव जी उठे।
53 और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए, और बहुतों को दिखाई दिए।
54 तब सूबेदार और जो उसके साथ यीशु का पहरा दे रहे थे, भूकम्प और जो कुछ हुआ था, देखकर अत्यन्त डर गए, और कहा, “सचमुच यह परमेश्वर का पुत्र था!”
55 वहाँ बहुत सी स्त्रियाँ जो गलील से यीशु की सेवा करती हुईं उसके साथ आईं थीं, दूर से देख रही थीं।
56 उनमें मरियम मगदलीनी और याकूब और योसेस की माता मरियम और जब्दी के पुत्रों की माता थीं।
5 मैं प्यासा हूँ।, यूहन्ना 19:28-29
28 इसके बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है; इसलिए कि पवित्रशास्त्र की बात पूरी हो कहा, “मैं प्यासा हूँ।”
29 वहाँ एक सिरके से भरा हुआ बर्तन धरा था, इसलिए उन्होंने सिरके के भिगाए हुए पनसोख्ता को जूफे पर रखकर उसके मुँह से लगाया। (भज. 69:21)
6 "पूरा हुआ"; यूहन्ना 19:30-37
30 जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा, “पूरा हुआ”; और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए। (लूका 23:46, मर. 15:37)
भाले से बेधा जाना; यूहन्ना 19:30-37
31 और इसलिए कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पिलातुस से विनती की, कि उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ ताकि सब्त के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्योंकि वह सब्त का दिन बड़ा दिन था। (मर. 15: 42, व्यव. 21:22,23)
32 इसलिए सिपाहियों ने आकर पहले की टाँगें तोड़ी तब दूसरे की भी, जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे।
33 परन्तु जब यीशु के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उसकी टाँगें न तोड़ी।
34 परन्तु सिपाहियों में से एक ने बरछे से उसका पंजर बेधा और उसमें से तुरन्त लहू और पानी निकला।
35 जिसने यह देखा, उसी ने गवाही दी है, और उसकी गवाही सच्ची है; और वह जानता है, कि सच कहता है कि तुम भी विश्वास करो।
36 ये बातें इसलिए हुईं कि पवित्रशास्त्र की यह बात पूरी हो, “उसकी कोई हड्डी तोड़ी न जाएगी।” (निर्ग. 12:46, गिन. 9:12, भज. 34:20)
37 फिर एक और स्थान पर यह लिखा है, “जिसे उन्होंने बेधा है, उस पर दृष्टि करेंगे।” (जक. 12:10)
यीशु का प्राण त्यागना
7 "हे पिता, मै अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपत हूँ।" लूका 23:44-49
44 और लगभग दोपहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अंधियारा छाया रहा,
45 और सूर्य का उजियाला जाता रहा, और मन्दिर का परदा बीच से फट गया, (आमो. 8:9; इब्रा. 10:19)
46 और यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।” और यह कहकर प्राण छोड़ दिए।
47 सूबेदार ने, जो कुछ हुआ था देखकर परमेश्वर की बड़ाई की, और कहा, “निश्चय यह मनुष्य धर्मी था।”
48 और भीड़ जो यह देखने को इकट्ठी हुई थी, इस घटना को देखकर छाती पीटती हुई लौट गई।
49 और उसके सब जान-पहचान, और जो स्त्रियाँ गलील से उसके साथ आई थीं, दूर खड़ी हुई यह सब देख रही थीं। (भज. 38:11, भज. 88:8)

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