क्या स्वर्ग और नरक का अस्तिन है

क्या स्वर्ग और नरक का अस्तिन है?

 क्या यह एक वास्तविकता है

क्या मृत्यु के बाद जीवन है

मृत्यु के बाद क्या होगा

 

इन विषयों पर हम सब ने कभी न कभी विचार किया होगा। कितना अच्छा होगा अगर इनकी थोड़ी सी झलक पहले ही मिल जाए। जैसे उमर बढ़ती है, ये प्रश्न और अधिक जटिल होते जाते" 

आशा”हमारे इस जीवन को सहने योग्य बनाती है। 

इस किताब में इन अनन्त काल के प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश की गई है। यह असलियत है। अपने अनन्त भविष्य की नियति खोजने के लिएइसे पढ़कर देखें। 

मृत्यु के बाद का जीवन 

इस संसार में प्रत्येक वस्तु अनिश्चित है, केवल एक चीज़ को छोड़ कर और वह है मृत्यु। मृत्यु के बाद क्या होगा... 

यह ख्याल बहुत लोगों को सताता है। जब कोई मर जाता है, शोकित लोगों को यह कह कर तसल्ली दी जाती है कि उनके प्रिय जन का”स्वर्गवास हो गया है। 

आप किस ओर जा रहे हैं 

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा, कि स्वर्ग का द्वार सबके लिए नहीं खुला है और अधिकतर लोग अपने आप को नरक जाने की तैयारी कर रहे हैं। बहुत लोग नहीं जानते कि वे कहाँ जा रहे हैं। अब समय आ चुका है कि आप जान लें कि पवित्र बाइबल के प्रकाशन के अनुसार आप किस ओर जा रहे हैं। 

पवित्र बाइबल बताती है कि जब इंसान मर जाता है, उसके मृतक शरीर से आत्मा बाहर निकलती है, और वह भौतिक शरीर जैसे ही संवेदनशील रहती है। आत्मा की इंद्रियाँ जिस्मानी शरीर जैसे ही आध्यात्मिक दुनिया में संवेदनशील और क्रियाशील रहती हैं। यह आध्यात्मिक दुनिया, भौतिक दुनिया जैसे ही वास्तविक है। मगर वह हमारी शारीरिक आखों के लिए अदृश्य रहती है। ( लूका 9:30; 16:19-31 ; सभोपदेशक 12:7, मत्ती 10:28 ) मनुष्य की आत्मा अनन्त है, जो मृत्यु के बाद या तो स्वर्ग में अनन्त जीवन या नरक में अनन्त दण्ड पाता है। स्वर्ग वह स्थान है, जहाँ परमेश्वर अपनी महिमा और सामर्थ्य में अपने दूतों के साथ विराजमान है। स्वर्ग अनन्त आशीषों से भरा हुआ स्थान है, जहाँ प्रेम, आनन्द, शान्ति, भलाई, खुशहाली, आराम आदि भरपूर है। नरक सजा काटने का वह शापित स्थान है, जो कि शैतान और उसके दुष्ट दूतों के लिए तैयार किया गया था। ( मत्ती 25:41 ) वरना मनुष्य परमेश्वर की आज्ञा तोड़कर और शैतान की बातें सुनकर नरक की राह लेता है। पवित्र बाइबल बताती है कि नरक की सज़ा अनन्त है, जहाँ घोर अंधकार, अकेलापन, दुष्ट उत्पीडकों, तड़पाने वाली आग, प्यास, निराशा, भयंकर पीड़ा, चिल्लाहट, आदि होती है और जो कोई वहाँ पहुँचता है वह कभी बाहर नहीं आ सकता। वहाँ आत्माएँ दिन और रात पीड़ाओं से तड़प रही हैं। ( लूका 13:28, मत्ती 13:42 ) 


Pastor Bablu Kumar 

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आपका भाग्य आपका चुनाव 

इस जीवन में आप जो चुनाव करते हैं वह आपकी अन्तिम मंजिल तय करता है अर्थात् स्वर्ग या नरक। इसलिए बुद्धिमान बनो और अपने लिए एक उत्तम भविष्य चुनो। अपने भविष्य का चुनाव करने के लिए आपको पूरा जीवन काल दिया गया है। हाँ, पूरा जीवन काल ! परन्तु हमारा जीवन काल छोटा है। मृत्यु किसी भी समय आ सकती है इसलिए आपको आज ही सही निर्णय लेना होगा। ( 2 कुरिन्थियो 6:2 ) 

अब सवाल यह है कि- आप मृत्यु के बाद के जीवन की तैयारी कैसे कर रहे हैं- जो कि अनन्त है? उस आने वाले जीवन - जो अनन्त है - उसकी तैयारी के लिए आप कितना महत्व देते हैं? 

आज आपकी प्राथमिकता क्या है?

 समय बहुत जल्दी बीत रहा है। पवित्र बाइबल के अनुसार मनुष्य के लिए एक ही बार मरना और उसके बाद न्याय का सामना करना नियुक्त है। ( इब्रानियों 9:27 ) 

बुद्धिमान बनो ! अपना बहुमूल्य समय संसार की नाशवान चीजों में न लगाकर धार्मिकता में लगाओ। 

इस संसार में जो भी धन, शोहरत, नाम, प्रसिद्धि आदि आप इकट्ठा करते हो वह सब यहीं का यहीं रह जायेगा। मृत्यु के बाद उसे आप अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं।

बोने और काटने का सिद्धांत 

इस जीवन काल में जो कर्म आपने किए हैं उसका प्रतिफल आपको मृत्यु के पश्चात् जरूर मिलेगा। पवित्र बाइबल बताती है:" धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उडाया जाता, क्योंकि जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे।.... जो अपने शरीर के लिए बोता हैं, वह ' शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा, परन्तु जो पवित्र आत्मा के लिए बोता है, वह पवित्र आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। ( गलातियों 6:7,8 ) ( यहाँ”शरीर शब्द, पापी स्वभाव के लिए इस्तेमाल हुआ है।) 

पापी स्वभाव क्या है? 

इस संसार में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति में पाप करने का स्वभाव है। यह वह शत्रु है, जो मनुष्य में वास करता है और उसे अनन्तकाल की सज़ा की ओर खींचता है। पवित्र बाइबल बताती है,जो मनुष्य में से निकलता है वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्यों के मन से कुविचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ और दुष्टता के काम तथा छल, कामुकता, ईर्ष्या, निन्दा, अहंकार और मूर्खता निकलती है। ये सब बुराइयाँ भीतर से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं। ( मरकुस 7:20-23 ) 

पाप की उत्पत्ति 

परमेश्वर के नियमों को तोड़ने पर पाप उत्पन्न हुआ। जब मनुष्य ने ईश्वरीय आज्ञा का उलंघन किया, उस में पापी स्वभाव जाग उठा। इस पापी स्वभाव के कारण मनुष्य पाप करता है, और दण्ड का भागी बनता है। मृत्यु और नरक पाप की सजा है। इसलिए पवित्र बाईबल कहती है कि एक मनुष्य के द्वारा पाप ... जगत में प्रवेश किया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई ' ( रोमियों 5:12 ) 

पाप की शक्तिः

पाप और मृत्यु एक भयंकर बीमारी की तरह है जिसका न तो कोई जाति, रंग, धर्म या नागरिकता है। पाप का विषाणु ( वायरस ) एडस के वायरस से भी ज्यादा घातक है। आज मनुष्य एडस वायरस से छुटकारा पाने में ज्यादा व्यस्त है जबकि पाप के वायरस से हर कोई प्रभावित है, और वह निश्चय अनन्त विनाश और पीड़ा की ओर सब को ले जा रहा है। 

मगर आप सोचते होंगे कि”मैने तो कोई पाप नहीं किया है और किसी के खिलाफ कोई बुराई भी नहीं की है। फिर मैं पापी कैसे हुआ? 

पवित्र बाईबल बताती है कि न्याय के दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने हर व्यर्थ बोले शब्दों का हिसाब देना होगा। ( मत्ती 12:36 ) 

जो कोई किसी स्त्री को कामुकता से देखे, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका। ( मत्ती 5:28 ) 

याद रखें, परमेश्वर मन को जाँचता और तोलता है। ( नीतिवचन 16:2 ) 

उसकी आँखें मनुष्य के हर इरादों को देखती हैं। इसलिए मनुष्य की असलीयत जानते हुए पवित्र बाइबल बताती है, कि”सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।”( रोमियों 3:23 ) 

"यदि हम कहें कि हम में पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं और हम में सत्य नहीं है।”( यूहन्ना 1:8 ) 

सब पापी हैं 

यह सोचने वाली बात है कि अगर हममें कोई पाप नहीं है तो - क्यों हम रोग का शिकार हो जाते हैं? -क्यों हर तरह की मानसिक, शारीरिक और आत्मिक पीड़ा सहते हैं? - क्यों मनुष्य अर्धम के कार्य करते हैं और अंत में मरते हैं। पवित्र बाईबल बताती है,मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया।”( रोमियो 5:12 ) 

जब मनुष्य मरता है, उसका शरीर नष्ट हो जाता है और मिट्टी में मिल जाता है। ( उत्पत्ति 3:19 ) 

मगर मनुष्य की आत्मा अगले जीवन के लिए जीवित रहती है। इस के पश्चात जब वह नरक की आग में अनन्त दण्ड भोगने जाता है, पवित्र बाइबल कहती है कि”जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में फेंक दिया गया।”( प्रकाशितवाक्य 20:15 ) 

इसकी कल्पना करना भी भयानक है। सच तो यह है कि मानव जाति के पास इस भयानक बीमारी जिसे पाप कहा जाता है इस का कोई इलाज नहीं है। 

पापियों का भाग्य 

पवित्र बाइबल साफ बताती है कि किस तरह के लोग स्वर्ग नहीं पहुंचते हैं। पवित्र बाइबल के वचनों में लिखा है कि”परन्तु डरपोकों, अविश्वासियों, घृणितों, हत्यारों, व्यभिचारियों, जादूगरों, मूर्तिपूजकों और सब झूठों का भाग उस झील में होगा जो आग और गंधक से जलती रहती है। यह दूसरी मृत्यु है। ( प्रकाशितवाक्य 21:8 )

( यहाँ नरक को आग और गंधक की झील बताया गया है। ) 

 पवित्र बाइबल बताती है:" शारीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं, परन्तु आध्यात्मिक तो आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है, क्योंकि शारीरिक मन तो परमेश्वर से शत्रुता करता है। वह न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है और न ही हो सकता है। जो शारीरिक है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।”( रोमियों 8:5-8 ) 

( यहाँ "आत्मा" शब्द का इस्तेमाल परमेश्वर की आत्मा”पवित्र आत्मा के लिए और शारीरिक शब्द”पापी स्वभाव से नियंत्रित व्यक्ति का वर्णन करता है ) पवित्र बाइबल बताती है,शरीर के काम स्पष्ट हैं, अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, कामुकता, मूर्तिपूजा, जादू - टोना, बैर झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, मतभेद, फूट, दलबन्दी, द्वेष, मतवालापन, रंगरेलियां तथा इस प्रकार के अन्य काम हैं जिनके विषय में मैं तुम को चेतावनी देता हूँ ... कि ऐसे - ऐसे काम करने वाले तो परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी न होंगे। ( गलातियों 5:19-21 ), 

( यहाँ”परमेश्वर के राज्य”शब्द स्वर्ग के राज्य को संदर्भित करता है। ) 

पवित्र बाइबल बताती है, इसलिए अपनी पार्थिव देह के अंगो को मृतक समझो, अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, वासना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्तिपूजा है। ( कुलुस्सियों 3:5 )

अब आप सवाल पूछ सकते हैं 

क्या इस पाप नामक घातक वायरस का कोई इलाज है? -

क्या मानव जाति के लिए कोई आशा है? 

मनुष्य द्वारा रचित पाप का हल 

मनुष्य ने अपने पाप के बंधन और शाप से मुक्ति पाकर स्वर्ग पहुँचने के लिए कई सारे नियम, संस्कार, कर्मकाण्ड, दर्शन शास्त्र, विचारधाराएँ, परम्पराएँ, अंधविश्वास आदि का आविष्कार किया। मगर कोई निश्चय नहीं कर पाता है कि इनके पालन करने से वह सच में स्वर्ग पहुँचेगा या नहीं। 

मनुष्य की ज़रूरत है एक उद्धारकर्ता 

एक चोर की कहानी बताना चाहता हूँ - वह जब पकड़ा गया गाँव वाले उसे एक पेड़ के साथ रस्सी से बाँध देते हैं। उस बंधन में वह अपनी गलती का एहसास करता है, रोता है, क्षमा माँगता है, पश्चाताप करता है और कसमें भी खाता है। मगर उसके आँसू और शब्दों में इतना बल नहीं था कि उस रस्सी को तोड़े। न वह खुद उस रस्सी को तोड़ पाया। एक बड़ी भीड़ उसे दूर से देख कर कई बातें कह रही थी। अचानक एक आदरणीय सज्जन वहाँ आता है और उस चोर के लिए गारंटी फिरौति देकर आज़ाद कराता है। देखो, पाप और पाप की सजा उस रस्सी के समान है जिसे मनुष्य खुद नहीं तोड़ पाता। उसे ज़रूरत है एक उद्धारकर्ता की। 

परमेश्वर किस नज़र से पापियों को देखता है? 

हमारा सृष्टिकर्ता परमेश्वर जिसका नियम हमने तोड़ा है वह प्रेमी और दयालु पिता है। वह नहीं चाहता कि किसी का नाश हो। पवित्र बाईबल बताती है,पाप की मज़दूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।”( रोमियों 6:23 ) 

मनुष्यों के पापों को मिटाने के लिए परमेश्वर की योजना

परमेश्वर पिता ने अपने अनन्त प्रेम से एक उपाय बनाया कि मनुष्य अपने पाप से होने वाली अनन्त विनाश से बच जाएं।

पवित्र बाईबल कहती है, क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, कि जो कोई उस पर विश्वास करे उसका नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए ... भेजा ... कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।”( यूहन्ना 3:16,17 ) 

( पवित्र बाईबल में प्रभु यीशु को परमेश्वर का पुत्र बताया गया है ) 

पवित्र बाइबल के अनुसार परमेश्वर जो स्वर्गीय पिता है, चाहता है कि मानव जाति पाप की सजा से बच जाए। इस कारण परमेश्वर स्वयं मानव शरीर में यीशु कहलाये इस पृथ्वी पर लगभग 2000 साल पूर्व एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य के साथ आया कि वह सारी मानव जाति के पापों की सजा अपने ऊपर उठाले। 

प्रभु यीशु इस जगत में उद्धारकर्ता बन के आया। जब प्रभु यीशु मसीह ने क्रूर क्रूस पर यातना और मृत्यु सही, तब अपने ऊपर हमारे पापों की सजा उठाई और हमें पाप के दण्ड से मुक्त किया। ( यशायाह 53:4 ) 

उसने अपना बहुमूल्य खून, हमें बचाने के लिए बहाया। पवित्र बाइबल बताती है -”यीशु का लहु हमें सब पाप से शुद्ध करता है।” ( 1 यूहन्ना 1:7 ) 

मृत्यु और नरक पर विजय 

मृत्यु को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। प्रभु यीशु तीसरे दिन मृत्यु से विजय पाकर इस शत्रु को हरा दिया और स्वर्ग चले गये। अब यीशु जिन्दा है और हमारी सहायता कर सकते हैं। ( 2 तीमथियुसा:10 ) 

जब हम सब नरक में सजा भुगतने जा रहे थे और हमें बचने की कोई आशा भी नहीं थी तब प्रभु यीशु ने हमारे लिये एक मार्ग बनाया। प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वर्ग का मार्ग तब बनता है जब वह उस कार्य को जो प्रभु यीशु मसीह ने उस में विश्वास करने लगता है। जब हम विश्वास करेंगे कि प्रभु यीशु मसीह ने हमारे पापों के लिए मौत सही, तो वह हमारा निज मुक्तिदाता बन जाता है, प्रभु यीशु हमें आशा भी देता है कि वह फिर दूसरी बार आएगा और जो कोई उसमें विश्वास करते हुए मरे उन्हें शारीरिक मौत में खोये हुए भौतिक शरीर के बदले महिमामय शरीर देगा। ( फिलिप्पियों 3:21 ) 

इस प्रकार प्रभु यीशु हमें उद्धार देकर हमारे शरीर, आत्मा और प्राण को अनन्त विनाश से बचाता है। ( थिस्सलुनीकियों 4:13-17 ) 

स्वर्ग का मार्ग 

मनुष्य अपनी कमाई से स्वर्ग का टिकट नहीं खरीद सकता। हमारी धार्मिकता, परोपकार, दान, त्याग, बलिदान, धर्मनिष्ठा आदि स्वर्ग का टिकट नहीं खरीद सकता। मगर प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुग्रह से हम सब की कीमत अपने कीमती रक्त द्वारा चुका दी है ताकि हम उसके धन की बहुतायत में निःशुल्क शामिल हो सकें। 

हम उसके अनुग्रह से तब बचाए जाते हैं जब हम ' जीवन दाता ' प्रभु यीशु मसीह पर पूरा विश्वास रखते हैं। ( यूहन्ना 6:40 ) 

चुनाव जो भविष्य को बदलता है 

आप को अपने भविष्य बदलने के लिए चुनाव करने का अधिकार दिया है। प्रभु यीशु मसीह आशाहीन को आशा देने, मरने वालों को जीवन देने, बीमारों को चंगाई देने, शापित को आशीष देने और नरक जाने वालों को स्वर्ग ले जाने आये है। 

प्रभु यीशु मसीह इस संसार में मार्ग बनाने आये ताकि हम अनन्त जीवन को पा सके। प्रभु यीशु ने घोषणा की”मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूँ। बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। ( युहन्ना 14:6 ) जब कोई प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन का उद्धारकर्ता स्वीकार करता है, उसका मुकद्दर बदल जाता है। 

प्रभु यीशु मसीह ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने स्वर्गीय पिता से मिलने का मार्ग बना दिया है। 

अनन्त जीवन पाने का कदम 

1. पवित्र बाइबल बताती हैं कि:" यदि हम अपने पापों को मान लें तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। ( 1युहन्ना 1:9 )" 

इसलिए अज्ञानता के समयों की अपेक्षा करके परमेश्वर अब हर जगह के सब मनुष्यों को आज्ञा देता है कि पश्चाताप करें।”( प्ररितों के काम 17:30 ) 

इसलिए अनिवार्य है कि हम अपने पापों का अंगीकार करें और पश्चात्ताप करें ( मन फिराएं )। 

2. विश्वास करें कि प्रभु यीशु मसीह ने हमारे पापों की सजा अपने ऊपर ले ली है और उसे अपने जीवन का उद्धारकर्ता स्वीकार करें। 

जीवन बदलने वाली प्रार्थना 

आपकी मदद के लिए एक सरल प्रार्थना नीचे दी गई है। इस प्रार्थना को सच्चे मन से करें ... 

प्रार्थना 

प्रभु यीशु, कृपया मेरे सब पापों को क्षमा कीजिए। मुझे अपने बहुमूल्य खून से शुद्ध कीजिए। मैं विश्वास करता हूँ कि आप मेरे पापों के लिए मारे गये, गाड़े गए और तीसरे दिन जी उठे। मैं विश्वास करता हूँ कि अब आप स्वर्ग में पिता के दाहिने हाथ बैठे हैं। कृपया मेरे जीवन में से हर शाप को निकाल दीजिए और दिल में वास करें। अपनी पवित्र आत्मा से मुझे भर दें। अपनी शांति से मुझे भर दें। मेरी मदद करें कि मैं जीवन भर आपका अनुसरण करूँ। आमीन 

अन्तिम चुनाव है आपका परमेश्वर के दिए हुए स्वतंत्र इच्छा शक्ति को प्रयोग करते हुए जब मनुष्य एक सही चुनाव करता है तब ही वह स्वर्ग में अनन्त जीवन प्राप्त कर सकता है। यह परमेश्वर की घोषित इच्छा है कि कोई भी नाश न हो। लेकिन परमेश्वर मनुष्य को मजबूर नहीं करता कि वह उसे ग्रहण करें और उसके प्रावधानों को स्वीकार करें। ( मत्ती 7:13 ) 

परमेश्वर ने मनुष्य को आजादी दी है कि वह स्वंय अपना भविष्य चुने। आप स्वंय अपना मुकद्दर चुनते हो। देर होने से पहले एक बुद्धिमान चुनाव कीजिए। आप अपनी राह में चलने के लिए स्वतंत्र हैं। ( मत्ती 11:15 ) 

यहोशु जो परमेश्वर का जन था उसने अपने लोगों से कहा, ' आज मैं स्वर्ग तथा पृथ्वी को तुम्हारे विरुद्ध साक्षी ठहराता हूँ कि मैंने तुम्हारे सामने जीवन तथा मृत्यु, और आशीष तथा शाप रखा है, अतः जीवन को चुन लें कि तू अपनी संतान सहित जीवित रहे। ( व्यवस्थाविवरण 30:19 ) 

अगर आपने पीछे दी हुई प्रार्थना को अपने मन से बोला है और प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता कह के ग्रहण किया है तो यकीनन उनके प्रेम, आनन्द, शान्ति और प्रभु यीशु के साथ अनन्त जीवन बिताने की आशा आपको होगी। अब आप रोज प्रभु से बात करे जैसे एक बच्चा अपने पिता से बात करता है। आपका भविष्य प्रभु यीशु मसीह के साथ महिमा से भरा हुआ होगा। परमेश्वर आपको आशीष दे। 

निःशुल्क निजी वितरण के लिए, 

Divine Light of Life Publication, Post Box No.3010, New Delhi - 110003 - India प्रार्थना के लिए कभी भी संपर्क करें 011-33999000,011-44600600 Hindi Title:Life Beyond Death ISBN 978-93-5137-697-2