एक महीने के प्रार्थना का जीवन - One Month of Prayer Life

"प्रार्थना एक जीवित आत्मा का परमेश्वर के साथ सम्पर्क है, प्रार्थना मनुष्य की विपन्नता को परमेश्वर की सम्पन्नता से भर देती है। प्रार्थना परमेश्वर के सामर्थ्य के आगमन पर मनुष्य की निर्बलता को दूर कर देती है।"

क्या कभी आपको ऐसा लगा कि आपकी प्रार्थनाएँ अब वैसी नहीं जैसी उन्हें होना चाहिएपरन्तु आपको इसका निश्चय भी नहीं कि क्योंआपको ज्ञात है कि आप किसी की चिन्ता करते हैं अथवा किसी वस्तु की आपको चिन्ता हैपरन्तु जब आप उसके लिए प्रार्थना करते हैं न तो कोई जीवन नजर आता न आशा और न ही आपकी प्रार्थना में कोई जय दिखाई देती हैठीक हैPASTOR BABLU KUMAR आपको प्रार्थना में एक नये उन्नत स्तरआत्मीयतातथा हियाव में ऊपर उठने के लिए सहायता हेतु तैयार की गई है।

पिछले कुछ वर्षों से परमेश्वर ने हमें प्रार्थना का बुनियादी अभिमत प्रदान किया है, बने रहनानिवास करनासामना करना। ये तीनों तत्व रस्सी की तीन लड़ियों के समान हैं, जो आपको एक मजबूत एवं प्रभावशाली प्रार्थना जीवन प्रदान करते हैं। जब कभी आपका प्रार्थना जीवन मानों किनारे से घिस रहा हो आप निश्चय पाएंगे कि इन तत्वों में से किसी की उपेक्षा की जा रही है। 

बने रहना ( ABIDING ) यह हमें परमेश्वर के साथ एक आत्मीय सम्पर्क में ला देता है जहाँ हम उसके हृदय व इच्छा को जान सकते हैं।

विश्वास करना ( BELIEVING )  यह हमें परमेश्वर के अधिकार तथा सामर्थी प्रतिज्ञाओं से जोड़ता हैं। 

सामना करना ( CONFRONTING ): यह परमेश्वर के राज्य के आगमन को देखने के लिए उसकी इच्छा तथा वचन की प्रयुक्ति है। ये तीनों तत्व मिलकर हमें परमेश्वर के हृदयानुसारवचनानुसार व उसके अधिकार के आत्मविश्वास में प्रार्थना करने के योग्य बनाते हैं। यह PASTOR BABLU KUMAR” आपके जीवन के इन्हीं तीन क्षेत्रों को परमेश्वर के अधिकाधिक वचन व दैनिक अभ्यास द्वारा मजबूत करने के लिए तैयार की गई हैं। दस दिन तक आप अपना ध्यान प्रभु में बने रहने पर केन्द्रित करेंगे कि परमेश्वर का वचन आपको परमेश्वर की उपस्थिति में खींच ले जाए। अगले दस दिन तक आप अपने मन को परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के द्वारा नया करते जाएंगेऔर अपने विश्वास में बढ़ते जाएंगे। तत्पश्चात दस दिन आप मसीह के अधिकार में खड़े होकर परमेश्वर की विजय की घोषणा करेंगे। प्रत्येक प्रविष्टी दैनिक मनन के रूप में प्रयुक्त की जा सकती हैइस में विषयानुसार वचन सन्दर्भो की श्रृंखला तथा साथ में प्रायोगिकता के लिए नमूने की प्रार्थना भी दी गई है। कृपया इने प्रार्थनाओं को केवल आरम्भ करने वाले बिन्दु के रूप में इस्तेमाल कर परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत वार्तालाप में प्रविष्ट हों।

 

बने रहना Abiding

यूहन्ना 15:5, मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।

बने रहना - "उपस्थित रहनासाथ जारी रहना एक बने रहना" निकट सम्पर्क हमेशा हमारे सृष्टिकर्ता की इच्छा रही है, जब परमेश्वर ने स्त्री व पुरुष को बनाया वह वाटिका में उनके साथ - साथ चलता था ( उत्पत्ति 2, 3 ) चूंकि पाप ने मानव व परमेश्वर के बीच एक पृथक्कता को ला खड़ा कियापरन्तु यीशु की मृत्यु इसलिए हुई कि मनुष्य फिर से परमेश्वर के निकट आ सके।

जब प्रभु यीशु, यूहन्ना 15, में बने रहने के विषय कहते हैं वहां प्रभु दाखलता व डालियों के विषय कहते हैं। जैसे एक डाली जब तक कि वह दाखलता में दृढता के साथ जुड़ी न हो फल नहीं ला सकती ठीक इसी प्रकार आप भी प्रभु यीशु के साथ एक निकट आत्मीय सम्बंध के बिना फल नही ला सकते।

उसने प्रतिज्ञा किया है कि यदि तुम उसमें बने रहोगे तो जो कुछ तुम प्रार्थना में मांगोगे वह पाओगे। यहीं से सारी प्रभावशाली प्रार्थना आरम्भ होती है, अर्थात यीशु के साथ एक निकट आत्मीय सम्बंध।

बने रहना वास्तव में परमेश्वर के साथ मित्रता है, यही वह स्थान है जहां प्रभु आपके साथ अपने दिल की बात बाँटेंगे तथा आप उसकी इच्छा को जानेंगे

 

बने रहना कैसे प्राप्त होता है?

मसीह को अपनी आवश्यकता स्वीकार करते हुए तथा क्रूस पर पूरे किए गये उसके कार्य को स्वीकार करने से। उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए है ( इब्रानियों 10:10 )

पुत्र प्रभु यीशु द्वारा पिता का आप्रतिबन्ध प्रेम ग्रहण करने के द्वारा। क्योंकि तुमको दासत्व की आत्मा नहीं मिली किफिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली हैजिससे हम - हे अब्बाहे पिताकहकर पुकारते हैं; रोमियो। 8:15

परमेश्वर विश्वासयोग्य है; जिसने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है। 1 कुरिन्थियों 1:9

यह कैसा दिखाई देता है? शान्तिप्रेमसुरक्षा

बने रहना वह स्थान है जहां परमेश्वर ही आपका सर्वप्रिय मित्र है। परमेश्वर पिता द्वारा प्रेम किया जाना तथा स्वीकार किया जाना है, इसमें संशयहीन आत्मविश्वास है। यह वह स्थान है जहां आप व परमेश्वर दोनों एक दूसरे के साथ अपने हृदय की बात कहते हैं।

इससे क्या प्राप्त होता है?
यह आपको शत्रुओं की पकड़ से मुक्त रखता है। आप बचाव का मार्ग पा लेते हैं कि जगत की अभिलाषाओं तथा शैतान व शरीर की अभिलाषाओं से भी बच जाते हैं। आप परमेश्वर की उपस्थिति में दृढ होते जाते हैं तथा आपका हृदय पिता परमेश्वर की योजना को अपने जीवन में समझने व पूरा करने की क्षमता पाते हैं। आपका जीवन आपके चारों ओर के लोगों के लिए एक सुगंध बनेगा।

क्या - क्या अवरोध है?
स्वावलम्बनमयअनाज्ञाकारिता तथा घमण्ड, और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है। इब्रानियों 11:6