क्या गुटखा, तंबाकू और शराब पाप हैं? - बाइबल क्या कहती है?
क्या गुटखा, तंबाकू और शराब आपकी ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं? — बाइबल क्या कहती है?
"क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है... इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।"
— 1 कुरिन्थियों 6:19–20
भूमिका
आज के समय में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब का सेवन केवल एक आदत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक ऐसी लत बन चुका है जिससे बाहर निकलना आसान नहीं लगता। कई लोग जानते हैं कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, फिर भी वे इसे छोड़ नहीं पाते।
शायद आप भी कई बार यह सोच चुके होंगे—
- "बस आज आखिरी बार।"
- "कल से छोड़ दूँगा।"
- "मैं चाहूँ तो कभी भी छोड़ सकता हूँ।"
लेकिन समय बीतता जाता है और आदत पहले से अधिक मजबूत होती जाती है।
यह लेख किसी की निन्दा करने के लिए नहीं लिखा गया है। इसका उद्देश्य केवल इतना है कि हम परमेश्वर के वचन की रोशनी में अपने जीवन को देखें और समझें कि परमेश्वर हमसे क्या चाहता है।
प्रश्न: क्या बाइबल में गुटखा, तंबाकू और शराब के बारे में लिखा है?
उत्तर: बाइबल में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी या सिगरेट का नाम नहीं मिलता, क्योंकि उस समय ये प्रचलित नहीं थे। लेकिन बाइबल स्पष्ट रूप से सिखाती है कि हमारी देह परमेश्वर का मंदिर है (1 कुरिन्थियों 6:19–20), हमें किसी भी वस्तु का दास नहीं बनना चाहिए (1 कुरिन्थियों 6:12), और मतवालापन पाप है (इफिसियों 5:18; गलातियों 5:19–21)। इसलिए मसीही विश्वासियों को ऐसी आदतों से बचना चाहिए जो शरीर, परिवार और आत्मिक जीवन को हानि पहुँचाती हैं।
क्या बाइबल में गुटखा या तंबाकू का नाम लिखा है?
बहुत से लोग पूछते हैं—
"यदि बाइबल में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी या सिगरेट का नाम नहीं लिखा है, तो इन्हें गलत कैसे कहा जा सकता है?"
यह सच है कि बाइबल में इन पदार्थों का नाम नहीं मिलता, क्योंकि उस समय ये प्रचलित नहीं थे।
लेकिन बाइबल ऐसे सिद्धांत देती है जो हर युग में लागू होते हैं।
बाइबल हमें सिखाती है—
- अपनी देह का सम्मान करो।
- किसी भी वस्तु के दास मत बनो।
- संयम से जीवन बिताओ।
- परमेश्वर की महिमा के लिए जियो।
यदि कोई आदत हमारे शरीर को नष्ट करती है, हमें उसका दास बना देती है और परमेश्वर की इच्छा से दूर ले जाती है, तो वह आत्मिक रूप से लाभदायक नहीं है।
हमारी देह परमेश्वर का मंदिर है
1 कुरिन्थियों 6:19–20
"क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है... इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।"
जब कोई व्यक्ति प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करता है, तो उसका जीवन केवल उसका अपना नहीं रहता।
उसकी देह परमेश्वर की है।
यदि हम अपने घर की रक्षा करते हैं, तो क्या परमेश्वर के मंदिर की रक्षा नहीं करनी चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसी चीज़ें अपने शरीर में डालता है जो उसे धीरे-धीरे नष्ट करती हैं, तो उसे यह विचार अवश्य करना चाहिए कि क्या वह वास्तव में अपनी देह से परमेश्वर की महिमा कर रहा है।
किसी भी वस्तु का दास मत बनो
1 कुरिन्थियों 6:12
"सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित हैं, परन्तु मैं किसी भी वस्तु के अधीन न होऊँगा।"
यही लत की सबसे बड़ी पहचान है।
यदि कोई व्यक्ति कहे—
- बिना गुटखे के नहीं रह सकता।
- बिना सिगरेट के बेचैनी होती है।
- बिना शराब के नींद नहीं आती।
तो इसका अर्थ है कि वह उस वस्तु का दास बन चुका है।
परन्तु परमेश्वर चाहता है कि उसका पुत्र या पुत्री केवल मसीह के अधीन रहे, किसी नशे के नहीं।
शराब के विषय में बाइबल क्या कहती है?
बाइबल विशेष रूप से मतवालापन (Drunkenness) की निन्दा करती है।
1. इफिसियों 5:18
"दाखमधु से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुच्चापन होता है; परन्तु आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।"
परमेश्वर चाहता है कि हमारा जीवन शराब से नहीं बल्कि पवित्र आत्मा से नियंत्रित हो।
2. गलातियों 5:19–21
मतवालापन शरीर के कामों में गिना गया है।
परमेश्वर स्पष्ट कहता है कि जो लोग ऐसे जीवन में बने रहते हैं और पश्चाताप नहीं करते, वे परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं होंगे।
3. 1 कुरिन्थियों 6:9–10
मतवाले लोगों के विषय में गंभीर चेतावनी दी गई है।
इसका उद्देश्य लोगों को डराना नहीं बल्कि उन्हें पश्चाताप की ओर बुलाना है।
4. रोमियों 13:13
विश्वासियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और मतवालापन से दूर रहने की शिक्षा दी गई है।
पुराने नियम की चेतावनी
नीतिवचन 20:1
"दाखमधु ठट्ठा करने वाला और मदिरा हल्ला मचाने वाली है; जो इनके कारण बहकता है वह बुद्धिमान नहीं।"
नीतिवचन 23:29–35
यहाँ शराब के दुष्परिणामों का विस्तृत वर्णन मिलता है—
- दुःख
- झगड़े
- घाव
- लाल आँखें
- मानसिक भ्रम
- अंत में साँप के समान डँसना
हजारों वर्ष पहले लिखा गया यह वर्णन आज भी पूरी तरह सत्य दिखाई देता है।
गुटखा और तंबाकू क्यों खतरनाक हैं?
यद्यपि बाइबल इनका नाम नहीं लेती, फिर भी इनके परिणाम स्पष्ट हैं।
शारीरिक नुकसान
- मुँह का कैंसर
- गले का कैंसर
- फेफड़ों की बीमारी
- हृदय रोग
- दाँत और मसूड़ों का नष्ट होना
- साँस की दुर्गंध
- कमज़ोर प्रतिरक्षा
मानसिक प्रभाव
- चिड़चिड़ापन
- बेचैनी
- निर्भरता
- आत्म-नियंत्रण में कमी
पारिवारिक प्रभाव
- आर्थिक नुकसान
- घर में तनाव
- बच्चों पर गलत प्रभाव
- परिवार का विश्वास कम होना
आत्मिक प्रभाव
जब कोई आदत हमारे जीवन पर नियंत्रण करने लगती है, तो हमारी प्रार्थना, बाइबल अध्ययन और आत्मिक विकास भी प्रभावित होने लगता है।
क्या परमेश्वर ऐसे व्यक्ति को क्षमा कर सकता है?
हाँ।
यही सुसमाचार की सबसे बड़ी आशा है।
यीशु मसीह केवल अच्छे लोगों के लिए नहीं आए।
वे पापियों को बचाने आए।
यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से पश्चाताप करता है, तो प्रभु उसे क्षमा करते हैं और नया जीवन देते हैं।
यदि आदत नहीं छूट रही तो क्या करें?
1. प्रभु यीशु के सामने स्वीकार करें।
अपनी कमजोरी छिपाइए मत।
2. प्रतिदिन प्रार्थना करें।
परमेश्वर से सामर्थ्य माँगिए।
3. बाइबल पढ़िए।
विशेष रूप से—
- रोमियों 12
- भजन संहिता 51
- गलातियों 5
- इफिसियों 5
4. बुरी संगति छोड़िए।
जो लोग आपको नशे की ओर ले जाते हैं, उनसे दूरी बनाइए।
5. कलीसिया की संगति में बने रहिए।
विश्वासी भाइयों-बहनों का साथ आत्मिक जीवन को मजबूत करता है।
6. आवश्यकता हो तो चिकित्सकीय सहायता लें।
यदि आपको गंभीर लत है, तो प्रार्थना के साथ-साथ योग्य चिकित्सक या नशा मुक्ति विशेषज्ञ की सहायता लेना भी बुद्धिमानी है। परमेश्वर चिकित्सा और परामर्श जैसे साधनों का भी उपयोग कर सकते हैं।
आज स्वयं से ये प्रश्न पूछिए
- क्या मेरी यह आदत परमेश्वर को प्रसन्न करती है?
- क्या मेरा परिवार इससे खुश है?
- क्या मेरे बच्चे मेरा अनुसरण करें तो मुझे खुशी होगी?
- क्या मैं अपनी देह से परमेश्वर की महिमा कर रहा हूँ?
- क्या मैं किसी आदत का दास बन चुका हूँ?
यदि इनमें से किसी प्रश्न का उत्तर आपको परेशान करता है, तो आज ही परिवर्तन का निर्णय लीजिए।
आज ही यह निर्णय लें
- मैं गुटखा छोड़ूँगा।
- मैं तंबाकू छोड़ूँगा।
- मैं बीड़ी और सिगरेट छोड़ूँगा।
- मैं शराब और मतवालेपन से दूर रहूँगा।
- मैं अपनी देह का सम्मान करूँगा।
- मैं अपने परिवार के लिए अच्छा उदाहरण बनूँगा।
- मैं परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने का प्रयास करूँगा।
नशे पर बाइबल के प्रमुख वचन
पुराने नियम (Old Testament)
1. नीतिवचन 20:1
"दाखमधु ठट्ठा करनेवाला और मदिरा हल्ला मचानेवाली है; जो कोई उनके कारण चूक करता है, वह बुद्धिमान नहीं।"
सीख: शराब मनुष्य की बुद्धि और विवेक को भ्रष्ट कर सकती है।
2. नीतिवचन 23:29–35
इस पूरे भाग में शराब के दुष्परिणामों का विस्तृत वर्णन मिलता है—दुःख, झगड़े, चोटें, लाल आँखें, मानसिक भ्रम और अंत में सर्प के समान डँसने का चित्रण।
सीख: नशे की शुरुआत आकर्षक लग सकती है, लेकिन उसका अंत विनाशकारी होता है।
3. नीतिवचन 31:4–5
"हे लमूएल, राजाओं को दाखमधु पीना शोभा नहीं देता..."
सीख: नेतृत्व करने वालों को संयमी होना चाहिए ताकि वे न्यायपूर्वक निर्णय ले सकें।
4. यशायाह 5:11–12
जो लोग सुबह से रात तक मदिरा के पीछे लगे रहते हैं, उन पर परमेश्वर की चेतावनी दी गई है।
सीख: नशा मनुष्य का ध्यान परमेश्वर से हटाकर सांसारिक इच्छाओं में लगा देता है।
5. यशायाह 5:22
"हाय उन पर जो दाखमधु पीने में शूरवीर हैं।"
सीख: शराब पीने को अपनी ताकत या शान समझना परमेश्वर की दृष्टि में उचित नहीं है।
6. यशायाह 28:7–8
यहाँ याजकों और भविष्यद्वक्ताओं के भी मदिरा के कारण लड़खड़ाने की निन्दा की गई है।
सीख: आत्मिक अगुवों को भी संयमी और पवित्र जीवन जीना आवश्यक है।
7. हबक्कूक 2:15
"हाय उस पर जो अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाकर उसे मतवाला करता है..."
सीख: दूसरों को पाप या नशे की ओर ले जाना भी परमेश्वर को अप्रसन्न करता है।
8. लैव्यव्यवस्था 10:8–11
याजकों को सेवा के समय मदिरा पीने से मना किया गया।
सीख: परमेश्वर की सेवा करने वालों को स्पष्ट विवेक और पवित्र जीवन रखना चाहिए।
9. गिनती 6:1–4
नाज़ीर की मन्नत लेने वाले व्यक्ति को दाखमधु और मदिरा से दूर रहने की आज्ञा दी गई।
सीख: जो परमेश्वर के लिए अलग जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें आत्म-संयम रखना चाहिए।
नया नियम (New Testament)
10. लूका 21:34
"सावधान रहो, ऐसा न हो कि तुम्हारे मन मतवालेपन और संसार की चिन्ताओं से दब जाएँ।"
सीख: नशा आत्मिक जागरूकता को कम कर देता है।
11. रोमियों 13:13
विश्वासियों को पियक्कड़पन और अनैतिक जीवन से दूर रहने की शिक्षा दी गई है।
सीख: मसीही जीवन सम्मान, पवित्रता और संयम का जीवन है।
12. 1 कुरिन्थियों 5:11
यदि कोई अपने को विश्वासी कहे और लगातार पियक्कड़ जीवन जीता रहे, तो उससे संगति न रखने की शिक्षा दी गई है।
सीख: कलीसिया को पाप को सामान्य नहीं मानना चाहिए।
13. 1 कुरिन्थियों 6:9–10
"पियक्कड़... परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।"
सीख: लगातार पापमय जीवन में बने रहने के विरुद्ध गंभीर चेतावनी दी गई है।
14. 1 कुरिन्थियों 6:12
"मैं किसी भी वस्तु के अधीन न होऊँगा।"
सीख: कोई भी लत विश्वासी पर प्रभुत्व न करे।
15. 1 कुरिन्थियों 6:19–20
"तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है..."
सीख: हमें अपने शरीर की देखभाल करनी चाहिए और उससे परमेश्वर की महिमा करनी चाहिए।
16. गलातियों 5:19–21
मतवालापन शरीर के कामों में गिना गया है।
सीख: परमेश्वर अपने लोगों को पवित्र और आत्म-संयमी जीवन के लिए बुलाते हैं।
17. इफिसियों 5:18
"दाखरस से मतवाले न बनो... पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।"
सीख: विश्वासी का जीवन शराब से नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा से नियंत्रित होना चाहिए।
18. रोमियों 12:1
"अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।"
सीख: हमारी पूरी जीवनशैली परमेश्वर को समर्पित होनी चाहिए।
19. 1 थिस्सलुनीकियों 5:6–8
विश्वासियों को जागते, संयमी और विश्वास में दृढ़ रहने की शिक्षा दी गई है।
20. 1 तीमुथियुस 3:2–3
कलीसिया के अध्यक्ष को पियक्कड़ नहीं होना चाहिए।
सीख: आत्मिक अगुवों का चरित्र अनुकरणीय होना चाहिए।
21. 1 तीमुथियुस 3:8
सेवकों को बहुत दाखरस पीने वाला नहीं होना चाहिए।
22. तीतुस 1:7
परमेश्वर का भण्डारी पियक्कड़ न हो।
23. तीतुस 2:2–3
बूढ़े पुरुष और स्त्रियाँ संयमी हों और मदिरा की दास न हों।
24. 1 पतरस 4:3
विश्वासियों को अपने पुराने मतवालेपन और पापमय जीवन को छोड़कर नया जीवन जीने की शिक्षा दी गई है।
निष्कर्ष
बाइबल गुटखा, तंबाकू या सिगरेट का नाम लेकर चर्चा नहीं करती, लेकिन वह स्पष्ट रूप से सिखाती है कि हमारी देह परमेश्वर का मंदिर है, हमें किसी भी वस्तु का दास नहीं बनना चाहिए, और मतवालापन पाप है। इसलिए एक विश्वासी को ऐसा जीवन चुनना चाहिए जो परमेश्वर की महिमा करे, परिवार के लिए आशीष बने और दूसरों के सामने मसीह का अच्छा गवाह ठहरे।
यदि आज आप सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह की ओर लौटते हैं, तो उनके पास आपके लिए क्षमा, छुटकारा और एक नया जीवन उपलब्ध है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या गुटखा खाना बाइबल के अनुसार पाप है?
बाइबल में गुटखा का नाम नहीं मिलता, क्योंकि उस समय यह प्रचलित नहीं था। लेकिन बाइबल सिखाती है कि हमारी देह परमेश्वर का मंदिर है (1 कुरिन्थियों 6:19–20) और हमें किसी भी वस्तु का दास नहीं बनना चाहिए (1 कुरिन्थियों 6:12)। इसलिए मसीही विश्वासियों को ऐसी आदतों से बचना चाहिए जो शरीर और आत्मिक जीवन को हानि पहुँचाती हैं।
2. क्या तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट पीना सही है?
यद्यपि बाइबल में इनका नाम नहीं है, फिर भी बाइबल शरीर की पवित्रता, आत्म-संयम और परमेश्वर की महिमा के लिए जीवन जीने की शिक्षा देती है। इसलिए विश्वासियों को इन हानिकारक आदतों से दूर रहना चाहिए।
3. क्या शराब पीना पाप है?
बाइबल विशेष रूप से मतवालापन (Drunkenness) के विरुद्ध चेतावनी देती है (इफिसियों 5:18; गलातियों 5:19–21; 1 कुरिन्थियों 6:9–10)। विश्वासियों को संयमी और पवित्र जीवन जीने की शिक्षा दी गई है।
4. क्या हमारी देह वास्तव में परमेश्वर का मंदिर है?
हाँ। 1 कुरिन्थियों 6:19–20 के अनुसार विश्वासियों की देह पवित्र आत्मा का मंदिर है। इसलिए हमें अपने शरीर का सम्मान करना चाहिए और उससे परमेश्वर की महिमा करनी चाहिए।
5. क्या प्रभु यीशु नशे की लत से छुटकारा दिला सकते हैं?
हाँ। जो व्यक्ति सच्चे मन से पश्चाताप करता है और प्रभु यीशु पर विश्वास करता है, उसे परमेश्वर क्षमा, नया जीवन और बुरी आदतों पर विजय पाने की सामर्थ्य देते हैं।
6. यदि मैं कई वर्षों से गुटखा या शराब का सेवन कर रहा हूँ, तो क्या मेरे लिए आशा है?
बिल्कुल। प्रभु यीशु मसीह हर उस व्यक्ति को नया जीवन देना चाहते हैं जो सच्चे मन से उनकी ओर लौटता है। परमेश्वर का अनुग्रह किसी भी बंधन से छुड़ाने में सामर्थी है।
7. नशा छोड़ने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?
प्रतिदिन प्रार्थना करें, परमेश्वर का वचन पढ़ें, बुरी संगति से दूर रहें, विश्वासियों की संगति में बने रहें और यदि लत गंभीर हो तो योग्य चिकित्सक या नशा मुक्ति विशेषज्ञ की सहायता भी लें।
8. बाइबल नशे के बारे में क्या सिखाती है?
बाइबल मतवालापन की निन्दा करती है, आत्म-संयम का जीवन जीने की शिक्षा देती है, और विश्वासियों को अपनी देह से परमेश्वर की महिमा करने के लिए बुलाती है (इफिसियों 5:18; 1 कुरिन्थियों 6:19–20; रोमियों 12:1)।
प्रार्थना
हे स्वर्गीय पिता, मैं स्वीकार करता हूँ कि मेरे जीवन में ऐसी आदतें हैं जो आपको प्रसन्न नहीं करतीं। प्रभु यीशु, मुझे गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब और हर प्रकार की बुरी लत से मुक्त कीजिए। मुझे आत्म-संयम, पवित्र जीवन और आपकी आज्ञा में चलने की सामर्थ्य दीजिए। मेरी देह को आपकी महिमा का साधन बनाइए। मुझे ऐसा जीवन दीजिए जो मेरे परिवार, समाज और आपकी कलीसिया के लिए आशीष बने। प्रभु यीशु के नाम में प्रार्थना करता हूँ। आमीन।
यदि यह संदेश आपके लिए आशीष का कारण बने, तो कृपया इसे अपने परिवार, मित्रों और WhatsApp समूहों में भी साझा करें। हो सकता है परमेश्वर इसी संदेश के द्वारा किसी का जीवन बदल दें।

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