यीशु मसीह का न्याय आसन | The Judgment Seat of Jesus Christ

भूमिका

📖 इब्रानियों 9:27
"और जैसे मनुष्यों के लिए एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।"

📖 2 कुरिन्थियों 5:10
 "क्योंकि अवश्य है कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाए, ताकि हर एक व्यक्ति उन कामों के अनुसार जो उसने देह में रहकर किए हों, भला या बुरा, बदला पाए।"

जैसे बाइबल में एक से अधिक पुनरुत्थान का वर्णन है, वैसे ही एक से अधिक न्याय का भी वर्णन है।

📖 यूहन्ना 5:28-29
"वे सब जो कब्रों में हैं उसका शब्द सुनेंगे; और जिन्होंने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये निकलेंगे, और जिन्होंने बुराई की है वे दण्ड के पुनरुत्थान के लिये निकलेंगे।"

आदम के पाप के कारण सब मनुष्यों पर मृत्यु आई।

📖 रोमियों 5:12
"एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई; और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई।"

मसीह के जी उठने के कारण सबका जी उठना निश्चित है।

📖 1 कुरिन्थियों 15:22
"जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसे ही मसीह में सब जिलाए जाएंगे।"

परमेश्वर ने समस्त पृथ्वी का न्याय करने के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को नियुक्त किया है।

📖 प्रेरितों के काम 17:31
"क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह जगत का न्याय धर्म से एक पुरुष के द्वारा करेगा, जिसे उसने नियुक्त किया है।"

इसलिए हर मनुष्य को एक दिन प्रभु के सामने खड़ा होना है।


बाइबल कम से कम सात विभिन्न न्यायों के विषय में बताती है


1) उद्धारकर्ता का क्रूस पर हमारे पापों के लिए न्याय
📖 यशायाह 53:5
"वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएँ।"
📖 1 पतरस 2:24
"वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया।"
हमारे पापों का दण्ड यीशु मसीह ने क्रूस पर सहा।


2) विश्वासियों का अपने प्रति स्वयं-न्याय
📖 1 कुरिन्थियों 11:31
"यदि हम अपने आप को जांचते, तो दण्ड न पाते।"
प्रभु भोज के अवसर पर और प्रतिदिन विश्वासी अपने
जीवन को जांचे।
 ➡ पाप को पहचानकर पश्चाताप करे।

3) मसीह के न्याय आसन के अवसर पर विश्वासियों का न्याय

📖 2 कुरिन्थियों 5:10
"हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाएगा।"

📖 रोमियों 14:10
"हम सब परमेश्वर के न्याय आसन के सामने खड़े होंगे।"

यहाँ उद्धार का नहीं, कार्यों और प्रतिफल का न्याय होगा।

4) जातियों का न्याय
📖 मत्ती 25:32
"सब जातियां उसके सामने इकट्ठी की जाएँगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकरियों से अलग करता है, वैसा ही वह उन्हें अलग करेगा।"

भेड़ और बकरियों का विभाजन होगा।

 ➡ धर्मी और अधर्मी अलग किए जाएंगे।

5) इस्राएल का न्याय

📖 यहेजकेल 20:37
"मैं तुम्हें गिन गिनकर छड़ी के नीचे से ले चलूँगा, और वाचा के बन्धन में बाँधूँगा।"

📖 यहेजकेल 20:38
"मैं तुम में से बलवा करने वालों को अलग कर दूँगा।"

महाक्लेश के बाद इस्राएल का शुद्धिकरण और न्याय होगा।

6) स्वर्गदूतों का न्याय

📖 यहूदा 1:6
"जिन स्वर्गदूतों ने अपनी प्रधानता स्थिर न रखी... उसने उन्हें बड़े दिन के न्याय के लिए अन्धकार में सदा के बन्धनों में रखा है।"
गिरे हुए दूत न्याय के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

7) दुष्ट मृतकों का न्याय

📖 प्रकाशितवाक्य 20:12
"मैंने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े देखा... और जैसा पुस्तकों में लिखा था, उनका न्याय किया गया।"

📖 प्रकाशितवाक्य 20:15
"जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।"

यह महान श्वेत सिंहासन के सामने अंतिम न्याय है।
 


1. न्याय की परिभाषा – न्याय आसन

📖 2 कुरिन्थियों 5:10
"क्योंकि अवश्य है कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाए, ताकि हर एक व्यक्ति उन कामों के अनुसार जो उसने देह में रहकर किए हों, भला या बुरा, बदला पाए।"

इस स्थान को "मसीह का न्याय आसन" कहा गया है।
 
यह विश्वासियों के उद्धार का न्याय नहीं, बल्कि उनके कार्यों और प्रतिफल का न्याय है।
 
यहाँ यह जांचा जाएगा कि हमने प्रभु के लिए कैसा जीवन जिया।

यह न्याय कहाँ होगा?
यह न्याय हवा में होगा।
📖 1 थिस्सलुनीकियों 4:16-17
"क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा... और मसीह में मरे हुए पहिले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।"

जब प्रभु आएंगे, विश्वासियों का पुनरुत्थान होगा।
 
जीवित विश्वासी उठा लिए जाएंगे।
 
फिर हम प्रभु से हवा में मिलेंगे
 
इसी समय मसीह का न्याय आसन माना जाता है।

मुख्य सत्य

यह दण्ड का स्थान नहीं। 
यह प्रतिफल का स्थान है।
यह विश्वासियों के लिए आनन्द का अवसर है।
यहाँ सेवकाई, विश्वासयोग्यता और जीवन की परीक्षा होगी।


2. न्याय का समय – न्याय आसन

1) प्रथम पुनरुत्थान के समय
📖 लूका 14:14
"और तू धन्य होगा, क्योंकि उनके पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इसका प्रतिफल मिलेगा।"

यह वचन बताता है कि विश्वासियों का प्रतिफल धर्मियों के जी उठने, अर्थात प्रथम पुनरुत्थान के समय मिलेगा।
 
जब प्रभु अपने लोगों को उठाएंगे, तब प्रतिफल देने का समय आएगा।

2) मसीह के दूसरे आगमन पर
📖 मत्ती 16:27
"क्योंकि मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा।"

जब प्रभु यीशु मसीह महिमा के साथ आएंगे, तब वह अपने सेवकों को उनके कामों के अनुसार प्रतिफल देंगे।
 
कोई भी कार्य प्रभु की दृष्टि से छिपा नहीं है।

मुख्य सत्य
न्याय आसन का समय प्रभु के आगमन से जुड़ा है।
यह विश्वासियों के लिए प्रतिफल पाने का समय है।
 
अच्छे और विश्वासयोग्य कार्यों का सम्मान होगा।
 
प्रभु हर एक को न्यायपूर्वक बदला देंगे।




3. न्याय के अवसर पर / किसका न्याय होगा?

इस न्याय में केवल विश्वासियों का ही न्याय किया जाएगा।
यह संसार के सभी लोगों का अंतिम न्याय नहीं है।
 ➡ यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किया है।

📖 2 कुरिन्थियों 5:10
"क्योंकि अवश्य है कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाए, ताकि हर एक व्यक्ति उन कामों के अनुसार जो उसने देह में रहकर किए हों, भला या बुरा, बदला पाए।"

यहाँ "हम सब" से अर्थ है विश्वासी जन, क्योंकि पौलुस विश्वासियों से बात कर रहा था।

यह किनका न्याय नहीं है?
यह अविश्वासियों के दण्ड का न्याय नहीं है।
 
यह उद्धार पाने या खोने का न्याय नहीं है।
 
यह महान श्वेत सिंहासन का न्याय नहीं है।

यह किनका न्याय है?
प्रभु के बच्चों का।
कलीसिया के विश्वासियों का।
उन लोगों का जिन्होंने प्रभु की सेवा की।
उन लोगों का जो मसीह में हैं।

📖 रोमियों 8:1
"अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं।"

इसलिए यह न्याय दण्ड के लिए नहीं, बल्कि प्रतिफल के लिए है।

मुख्य सत्य
केवल विश्वासी इस न्याय में होंगे।
 
यहाँ जीवन और सेवा का लेखा होगा।
 
यह मुकुट और प्रतिफल पाने का अवसर है।



4. इस न्याय के अवसर पर किस बात का न्याय किया जाएगा?

यह न्याय कोई ऐसा मुकदमा नहीं है जिसमें यह तय किया जाए कि कौन उद्धार पाएगा और कौन नहीं।
 
उद्धार कृपा से विश्वास के द्वारा मिलता है।
यहाँ विश्वासी के जीवन, सेवा, कार्य, वचन, विचार और उद्देश्यों का न्याय होगा।


सेवकों के कामों का लेखा
📖 मत्ती 25:14-30 (तोड़ों का दृष्टान्त)
स्वामी यात्रा पर गया और अपने सेवकों को एक, दो और पाँच तोड़े सौंपे।
 
लौटकर उसने उनसे लेखा लिया।
 
इसी प्रकार प्रभु भी अपने सेवकों से पूछेगा कि जो उसने दिया, उसका उपयोग कैसे किया।
पहले के पापों का लेखा नहीं लिया जाएगा
📖 इब्रानियों 10:17
"मैं उनके पापों को और उनके अधर्म के कामों को फिर कभी स्मरण न करूँगा।"

📖 1 यूहन्ना 1:9
"यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।"
हृदय परिवर्तन से पहले के पाप क्षमा किए गए।
 
अंगीकार किए गए पाप भी क्षमा और शुद्ध कर दिए जाते हैं।

किन बातों का न्याय होगा?

1) हमारे कार्यों का न्याय
📖 1 कुरिन्थियों 3:13
"हर एक का काम प्रगट हो जाएगा... और आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है।"

📖 सभोपदेशक 12:14
"क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा।"
हमने क्या किया, कैसे किया, किस भावना से किया—सब प्रकट होगा।

2) हमारी बातों का न्याय
📖 मत्ती 12:36-37
"जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। क्योंकि अपनी बातों के कारण तू निर्दोष और अपनी बातों के कारण दोषी ठहरेगा।"
हर शब्द की कीमत है।
वाणी का भी हिसाब देना होगा।

3) हमारे विचारों का न्याय

📖 मत्ती 15:19-20
"क्योंकि बुरे विचार, हत्या, व्यभिचार, छिनाला, चोरी, झूठी गवाही, निन्दा मन ही से निकलती है; यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।"

📖 मत्ती 5:28
"जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका।"
परमेश्वर केवल बाहरी काम नहीं, मन के विचार भी देखता है।

4) हमारी गुप्त बातों का न्याय
📖 रोमियों 2:16
"जिस दिन परमेश्वर मेरे सुसमाचार के अनुसार यीशु मसीह के द्वारा मनुष्यों की गुप्त बातों का न्याय करेगा।"
जो बातें लोग नहीं जानते, वे भी प्रभु के सामने प्रकट होंगी।

5) हमारे उद्देश्यों का न्याय

(1) सही उद्देश्य
📖 2 कुरिन्थियों 5:14
"क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश करता है।"
यदि सेवा प्रेम से की गई, वह मूल्यवान है।

(2) गलत उद्देश्य

📖 1 कुरिन्थियों 3:21
"इसलिए मनुष्यों पर कोई घमण्ड न करे।"

दिखावा, नाम, प्रसिद्धि, आत्म-प्रशंसा के लिए किया कार्य प्रतिफल नहीं पाएगा।


मुख्य सत्य

यहाँ उद्धार का नहीं, कार्यों का न्याय होगा। 

पाप क्षमा किए जा सकते हैं, यदि अंगीकार किए जाएँ।
 

कार्य, वचन, विचार, गुप्त बातें और उद्देश्य सब जांचे जाएँगे।

प्रभु केवल क्या किया नहीं, क्यों किया—यह भी देखेगा।


5. परमेश्वर न्याय के अवसर पर किस प्रकार न्याय करेगा?

परमेश्वर का न्याय पूर्णतः सत्य, पवित्र, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होगा।
 

किसी प्रकार का पक्षपात, गलती या अन्याय उसमें नहीं होगा।
 

हर व्यक्ति के कार्यों की जांच की जाएगी।


1) अग्नि द्वारा परीक्षा होगी

📖 1 कुरिन्थियों 3:13
"हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा, इसलिए कि आग के साथ प्रकट होगा; और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है।"


यहाँ अग्नि का अर्थ वास्तविक आग से अधिक परीक्षा और जांच से है।
 

जैसे आग सोने और नकली वस्तु में भेद करती है, वैसे ही परमेश्वर हमारे कार्यों की सच्चाई प्रकट करेगा।

कौन सा कार्य शुद्ध है और कौन सा व्यर्थ—सब सामने आएगा।


2) न्याय सार्वजनिक और निष्पक्ष होगा

📖 रोमियों 2:11
"क्योंकि परमेश्वर किसी का पक्षपात नहीं करता।"

कोई यह नहीं कह सकेगा कि परमेश्वर ने किसी के साथ अन्याय किया।
 

सब कुछ सच्चाई और धर्म से होगा।


3) जैसा बोया वैसा काटेगा

📖 गलातियों 6:7-8
"धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर से विनाश काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा से अनन्त जीवन काटेगा।"

जीवन में जो बोते हैं, उसी के अनुसार फल मिलेगा।
 

पाप बोने वाला हानि पाएगा।
 

आत्मिक जीवन बोने वाला प्रतिफल पाएगा।


मुख्य सत्य

परमेश्वर का न्याय निष्पक्ष होगा।
 

कार्यों की गुणवत्ता परखी जाएगी।
 

छिपी बातें भी प्रकट होंगी।
 

जैसा बोया है, वैसा ही फल मिलेगा।
 

इसलिए आज ही पवित्र और विश्वासयोग्य जीवन जिएँ।



6. इस न्याय के परिणाम क्या होंगे?

मसीह के न्याय आसन पर प्रत्येक विश्वासी के कार्यों की परीक्षा होगी।
 

जो कार्य परमेश्वर की दृष्टि में सच्चे, पवित्र और विश्वासयोग्य पाए जाएंगे, उनका प्रतिफल मिलेगा।
 

जो कार्य व्यर्थ, स्वार्थी या गलत उद्देश्य से किए गए होंगे, वे नष्ट हो जाएंगे।


1) अच्छे कार्यों का प्रतिफल

📖 1 कुरिन्थियों 3:14
"यदि किसी का बनाया हुआ काम बना रहे, तो वह मजदूरी पाएगा।"

जो कार्य टिके रहेंगे, उनके लिए प्रभु प्रतिफल देंगे।
 

यह प्रतिफल सम्मान, प्रशंसा और मुकुट के रूप में हो सकता है।


2) जल जाने वाले कार्यों की हानि

📖 1 कुरिन्थियों 3:15
"यदि किसी का काम जल जाएगा, तो वह हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा, परन्तु जलते जलते।"

व्यक्ति स्वयं उद्धार पाएगा, क्योंकि वह प्रभु का है।
 ➡ परन्तु उसके व्यर्थ कार्य नष्ट हो जाएंगे।
 ➡ उसे प्रतिफल की हानि होगी।

3) हानि क्या हो सकती है?

बाइबल स्पष्ट रूप से नहीं बताती कि हानि क्या होगी।
 

बाइबल प्रतिफल मुकुट बताती है कहानी भी शायद मुकुट ही होगा

मुकुट से वंचित रह जाना
 

विशेष प्रतिफल खो देना
 

प्रभु के सामने लज्जा अनुभव करना
 

अवसर खो देना

📖 1 यूहन्ना 2:28
"अब हे बालको, उसमें बने रहो; ताकि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और उसके आने पर उसके सामने लज्जित न हों।"



4) मुकुट प्रभु के चरणों में रखना

📖 प्रकाशितवाक्य 4:10
"वे अपने अपने मुकुट सिंहासन के सामने डाल देते हैं।"

यदि हमें प्रतिफल मिलेगा, तो हम उसे प्रभु के चरणों में अर्पित कर सकेंगे।
 ➡ यदि मुकुट न मिला, तो यह लज्जा का कारण हो सकता है।

मुख्य सत्य

उद्धार नहीं खोएगा, पर प्रतिफल खो सकता है।

अच्छे कार्यों का सम्मान होगा।

व्यर्थ कार्य जल जाएंगे।

इसलिए प्रभु के लिए सच्चे मन से सेवा करें।
 ✔ ऐसा जीवन जिएँ कि उसके आने पर आनन्द मिले, लज्जा नहीं।


निर्माण सामग्री दो प्रकार की है:

1) अग्निसह - सोना, चांदी और बहुमूल्य पत्थर।

2) दहनशील - लकड़ी, भूसा और ठूंठ।


🔥 अग्निसह पदार्थ किन कार्यों को चित्रित करते हैं?

1) धार्मिकता - परमेश्वर की दृष्टि में एक शुद्ध और स्वच्छ जीवन।

2) ईमानदारी - सिर्फ मनुष्य के सन्मुख नहीं वरन परमेश्वर के सन्मुख।

3) विश्वास का जीवन - परमेश्वर, यीशु ख्रीष्ट, बाइबल आदि में विश्वास।

4) प्रेम - सच्चा प्रेम।

1 कुरिन्थियों 13 अध्याय का प्रेम, परमेश्वर के प्रति प्रेम और मनुष्य के प्रति प्रेम।


5) धैर्य

📖 2 पतरस 1:6
"ज्ञान से संयम, संयम से धीरज, धीरज से भक्ति।"

परमेश्वर चाहता है कि विश्वासी कठिन समय में भी धीरज रखे और विश्वास में स्थिर रहे।


6) नम्रता और दीनता

📖 मत्ती 11:28-29
"हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ; और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।"



यीशु मसीह स्वयं नम्र और दीन हैं, इसलिए हमें भी नम्र जीवन जीना चाहिए।



7) शान्तिपूर्ण

📖 मत्ती 5:9
"धन्य हैं वे, जो मेल कराने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे।"



📖 2 तीमुथियुस 2:22
"जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ धर्म, विश्वास, प्रेम और मेल-मिलाप का पीछा कर।"

परमेश्वर चाहता है कि हम झगड़े नहीं, बल्कि शान्ति और मेल-मिलाप के मार्ग पर चलें।


🔥 दहनशील पदार्थ किन कार्यों को चित्रित करते हैं?

1) सभी प्रकार के पाप और दुष्टता

📖 गलातियों 5:19-21
"शरीर के काम प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, लुचपन, मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, डाह... और ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।"

पापमय जीवन परमेश्वर को प्रसन्न नहीं करता।


2) छल-कपट और घूस

📖 नीतिवचन 17:23
"दुष्ट मनुष्य घूस लेकर न्याय बिगाड़ता है।"

रिश्वत और छल न्याय को बिगाड़ते हैं।


3) सभी प्रकार की बेईमानी

📖 नीतिवचन 11:1
"झूठा तराजू यहोवा से घृणित है, परन्तु ठीक बाट उसको भाता है।"

बेईमानी परमेश्वर को अप्रिय है।



4) प्रभाव डाल कर प्राप्त लाभ

📖 याकूब 2:1
"तुम हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास तो रखते हो, पर पक्षपात मत करो।"

पक्षपात, दबाव या प्रभाव से लाभ लेना गलत है।



5) जवानी की अभिलाषाओं की अधीनता

📖 1 तीमुथियुस 6:9-11
"जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा और फन्दे में फंसते हैं... पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग।"

📖 2 तीमुथियुस 2:22
"जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और धर्म, विश्वास, प्रेम और मेल-मिलाप का पीछा कर।"

📖 उत्पत्ति 39:12
"उसने उसका वस्त्र पकड़कर कहा, मेरे साथ सो; पर वह अपना वस्त्र उसके हाथ में छोड़कर भागा।"

यूसुफ ने पाप से भागकर पवित्रता का उदाहरण दिया।



6) बुरे उद्देश्यों से भले काम करना

📖 मत्ती 6:1
"सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिए अपने धर्म के काम न करो।"

दिखावे के लिए किया गया अच्छा काम भी परमेश्वर को स्वीकार नहीं।



7) गर्व – परमेश्वर की दृष्टि में निन्दनीय पाप



📖 नीतिवचन 16:18
"विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।"



📖 याकूब 4:6
"परमेश्वर घमण्डियों का विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।"

गर्व मनुष्य को गिराता है, नम्रता ऊपर उठाती है



7. मैं इस न्याय का सामना करने के लिए कैसे तैयारी कर सकता हूँ?

1) प्रभु यीशु मसीह की निरन्तर संगति द्वारा

📖 यूहन्ना 15:4
"तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में। जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से फल नहीं ला सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं ला सकते।"

प्रभु के साथ संगति रखने से जीवन फलवन्त बनता है।



2) बहुत अधिक आत्म-निरीक्षण द्वारा

📖 2 कुरिन्थियों 13:5
"अपने आप को जांचो कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को परखो।"

प्रतिदिन अपने जीवन को जांचना आवश्यक है।



3) निरन्तर अपने पापों का अंगीकार करने द्वारा

📖 1 यूहन्ना 1:9
"यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।"

अंगीकार से क्षमा और शुद्धता मिलती है।



4) परमेश्वर के वचन पर मनन और निरन्तर प्रार्थना द्वारा

📖 यहोशू 1:8
"व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से न उतरने पाए, इस पर दिन रात ध्यान देना।"

📖 1 थिस्सलुनीकियों 5:17
"निरन्तर प्रार्थना करो।"

वचन और प्रार्थना आत्मिक शक्ति देते हैं।



5) पवित्र आत्मा की इच्छा पर ध्यान देने द्वारा

📖 गलातियों 5:16
"आत्मा के अनुसार चलो, तो शरीर की अभिलाषा पूरी न करोगे।"

पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में चलना चाहिए।



6) विवेक को शुद्ध रखने द्वारा

📖 प्रेरितों के काम 24:16
"इस से मैं आप भी यत्न करता हूं, कि परमेश्वर की, और मनुष्यों की ओर मेरा विवेक सदा निर्दोष रहे।"

ऐसा जीवन जिएँ जिसमें मन और विवेक साफ रहे।



सारांश

एक विश्वासी के लिए मसीह का न्याय आसन भय का कारण नहीं है।


यह आनन्द और प्रतिफल का दिन है।
 

यह मुकुट पाने का दिन है।

यह प्रशंसा का दिन है।



📖 1 कुरिन्थियों 4:5

"इसलिये समय से पहिले किसी बात का न्याय न करो, जब तक प्रभु न आए; वही अन्धकार की छिपी बातें ज्योति में दिखाएगा और मनों की मन्त्रणा प्रगट करेगा; तब परमेश्वर की ओर से हर एक की प्रशंसा होगी।"


हमारे कई काम जल सकते हैं, परन्तु परमेश्वर अवश्य कुछ ऐसा पाएगा जो प्रशंसा के योग्य होगा।


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