“इस्राएली 70 वर्ष के लिए गुलामी में क्यों गए?”
यरूशलेम का पतन (यहूदियों की वापसी ) 2इतिहास 36:14-23
14 वरन सब प्रधान याजकों ने और लोगों ने भी अन्य जातियों के से घिनौने काम कर के बहुत बड़ा विश्वासघात किया, और यहोवा के भवन को जो उसने यरूशलेम में पवित्र किया था, अशुद्ध कर डाला।
15 और उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने बड़ा यत्न कर के अपने दूतों से उन के पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था;
16 परन्तु वे परमेश्वर के दूतों को ठट्ठों में उड़ाते, उस के वचनों को तुच्छ जानते, और उसके नबियों की हंसी करते थे। निदान यहोवा अपनी प्रजा पर ऐसा झुंझला उठा, कि बचने का कोई उपाय न रहा।
17 तब उसने उन पर कसदियों के राजा से चढ़ाई करवाई, और इस ने उनके जवानों को उनके पवित्र भवन ही में तलवार से मार डाला। और क्या जवान, क्या कुंवारी, क्या बूढ़े, क्या पक्के बाल वाले, किसी पर भी कोमलता न की; यहोवा ने सभों को उसके हाथ में कर दिया।
18 और क्या छोटे, क्या बड़े, परमेश्वर के भवन के सब पात्र और यहोवा के भवन, और राजा, और उसके हाकिमों के खजाने, इन सभों को वह बाबेल में ले गया।
19 और कसदियो ने परमेश्वर का भवन फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ ड़ाला, और आग लगा कर उसके सब भवनों को जलाया, और उस में का सारा बहुमूल्य सामान नष्ट कर दिया।
20 और जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों-पोतों के आधीन रहे।
21 यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे। इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।
22 फारस के राजा कूस्रू के पहिले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिये उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियां लिखवाईं,
23 कि फारस का राजा कू्स्रू कहता है, कि स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि यरूशलेम जो यहूदा में है उस में मेरा एक भवन बनवा; इसलिये हे उसकी प्रजा के सब लोगो, तुम में से जो कोई चाहे कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके साथ रहे, तो वह वहां रवाना हो जाए।
● 70 वर्ष वह परमेश्वर के हृदय को समझने का द्वार था।
सवाल यह नहीं है कि
इस्राएली 70 साल गुलामी में क्यों गए
बल्कि असली सवाल यह है कि
परमेश्वर ने उन्हें नष्ट क्यों नहीं किया?
याद रखिए:
• परमेश्वर क्रोधित हो सकता है
• लेकिन निर्दयी नहीं
• वह न्याय करता है
• लेकिन आशा के बिना नहीं
📖 भजन संहिता 103:8
यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
2. 📜 ऐतिहासिक और आत्मिक इस्राएल था
इस्राएल परमेश्वर की वाचा की प्रजा थी।
• मिस्र से छुड़ाए गए
• लाल समुद्र पार कराया गया
• व्यवस्था दी गई
• मंदिर दिया गया
लेकिन धीरे-धीरे:
• आज्ञाकारिता → दिखावा बन गई
• आराधना → रस्म बन गई
• पश्चाताप → दिखावा बन गया
📖 2 इतिहास 36:14
वरन सब प्रधान याजकों ने और लोगों ने भी अन्य जातियों के से घिनौने काम कर के बहुत बड़ा विश्वासघात किया, और यहोवा के भवन को जो उसने यरूशलेम में पवित्र किया था, अशुद्ध कर डाला।
चेतावनी देने वाले प्रमुख परमेश्वर के दास
1. मूसा (व्यवस्था 28 – पहले ही दण्ड की चेतावनी)
2. शमूएल
3. एलियाह
4. एलीशा
5. आमोस
6. होशे
7 यशायाह
8. मीका
9. नहूम
10. सपन्याह
11. हबक्कूक
12 यिर्मयाह (सबसे स्पष्ट – 70 वर्ष की भविष्यवाणी)
13 यहेजकेल (गुलामी के समय) Dhan ki udharan
❗ फिर भी गुलामी क्यों आई?
• मूर्तिपूजा
• अन्याय और अत्याचार
• झूठे भविष्यद्वक्ताओं की बात मानना
• सच्चे भविष्यद्वक्ताओं को ठुकराना
✝️ परमेश्वर दण्ड देने में जल्दी नहीं करता,
पर चेतावनी को ठुकराने का परिणाम अवश्य आता है।
● यह केवल पाप नहीं था, यह लगातार और जानबूझकर किया गया विद्रोह था।
3. 📖 मुख्य पाप था – सब्त वर्ष की विश्राम का अनादर करना:
📖 लैव्यव्यवस्था 25:3-4
“छह वर्ष तक तू अपने खेत में बोना… पर सातवें वर्ष भूमि के लिये यहोवा का विश्राम हो।”
लेकिन इस्राएल ने:
• लगभग 490 वर्षों तक
• भूमि को विश्राम नहीं दिया
👉 490 ÷ 7 = 70
📖 2 इतिहास 36:21
“जब तक देश अपने विश्राम-दिन पूरे न कर ले…”
🔑 आत्मिक सत्य:
जब हम परमेश्वर को विश्राम नहीं देते,
परमेश्वर हमें विश्राम सिखाने के लिए रोक देता है।
आज भी:
• हम काम में डूबे हैं
• सेवा में व्यस्त हैं
• लेकिन परमेश्वर के साथ रुकते नहीं
⚠️ व्यस्त ≠ आज्ञाकारिता
बाइबिल से उदाहरण, मार्था और मरियम का:
(लूका 10:38-42)
मार्था व्यस्त थी: वह सेवा के बहुत से कामों में फंसी हुई थी। वह प्रभु के लिए काम कर रही थी, लेकिन वह "व्यस्तता" में उलझ गई थी।
मरियम आज्ञाकारी थी: वह यीशु के चरणों में बैठकर उनकी बातें सुन रही थी। उसने "उत्तम भाग" चुन लिया था क्योंकि वह उस समय की मांग (आज्ञाकारिता) को समझ गई थी।
4. 🧠 मूर्तिपूजा – आत्मिक व्यभिचार के बारे में समझिये
मूर्तिपूजा केवल पत्थर की मूर्ति नहीं।
📖 यिर्मयाह 2:13
“मेरी प्रजा ने दो बुराइयाँ की हैं:
उन्होंने मुझे छोड़ दिया…
और अपने लिये हौद खोदे…”
मूर्तिपूजा का अर्थ:
• परमेश्वर से अधिक किसी और पर भरोसा
• परमेश्वर से अधिक किसी और से प्रेम
आज की मूर्तियाँ:
• पैसा
• पद
• मोबाइल
• स्वयं की इच्छा
• सेवकाई की शोहरत
📖 यहेजकेल 14:3
“इन लोगों ने अपने मन में मूर्तियाँ बिठा ली हैं…”
👉 परमेश्वर मन की मूर्तियों को भी देखता है।
5. ⚖️ चेतावनी के बावजूद हठ करना:
परमेश्वर ने:
• भविष्यद्वक्ता भेजे
• बार-बार समझाया
• समय दिया
📖 2 इतिहास 36:15-16
“यहोवा… अपने दूतों को बार-बार भेजता रहा…
पर वे ठट्ठा करते रहे…”
⚠️ जब परमेश्वर की आवाज़ का मज़ाक बनता है,
तब न्याय का द्वार खुलता है।
6. 🌱 70 साल – दंड नहीं, शुद्धिकरण था:
📖 विलापगीत 3:31-32
“यहोवा सदा के लिये त्याग नहीं देता…
वह दुःख देता है, पर दया भी करता है।”
बाबुल की गुलामी में क्या हुआ:
• मूर्तिपूजा समाप्त हुई
• आराधनालय शुरू हुए
• वचन का आदर बढ़ा
📖 भजन 119:71
“मेरे लिये दुःख उठाना भला ही हुआ,
जिससे मैं तेरी विधियों को सीखूँ।”
👉 कभी-कभी गुलामी,
स्वतंत्रता की तैयारी होती है।
7. 🌈 पुनःस्थापना की आशा:
📖 यिर्मयाह 29:10
“जब बाबुल के सत्तर वर्ष पूरे होंगे,
तब मैं तुम्हारी सुधि लूँगा…”
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बाइबल के अनुसार कसदियों (Babylon / Iraq) का राज्य फारसियों (Persia / Iran) के द्वारा अचानक और परमेश्वर की योजना के अनुसार गिरा। यह घटना इतिहास और भविष्यवाणी—दोनों की अद्भुत पूर्ति है।
कोई साधारण राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि
परमेश्वर की ठहराई हुई न्याय और योजना थी।
1️⃣ परमेश्वर का न्याय – घमंड और पाप के कारण
बाबुल का राजा (विशेषकर बेलशस्सर) बहुत घमंडी हो गया था।
📖 दानिय्येल 5:22–23
बेलशस्सर ने यह जानते हुए भी कि उसके पिता नबूकदनेस्सर को परमेश्वर ने दण्ड दिया था,
फिर भी
👉 परमेश्वर का आदर नहीं किया
👉 मंदिर के पवित्र पात्रों से मदिरा पी
👉 मूर्तियों की स्तुति की
➡️ इसलिए परमेश्वर का न्याय आया।
2️⃣ “लिखा हुआ न्याय” – मेने, मेने, तेकेल, ऊपारसीन
📖 दानिय्येल 5:25–28
दानिय्येल ने लिखा हुआ अर्थ बताया:
• मेने – परमेश्वर ने तेरा राज्य गिन लिया
• तेकेल – तू तौला गया और हल्का निकला
• ऊपारसीन – तेरा राज्य फारसियों को दिया जाएगा
दानिय्येल 5:30–31
उसी रात बेलशस्सर मारा गया और बाबुल गिर गया।
3️⃣ यिर्मयाह की भविष्यवाणी पूरी हुई
परमेश्वर ने पहले ही कह दिया था कि बाबुल का अंत होगा।
📖 यिर्मयाह 25:12
“जब सत्तर वर्ष पूरे हो जाएंगे, तब मैं बाबुल के राजा और उस जाति को दण्ड दूँगा।”
➡️ फारसी राजा कुरूश (Cyrus) के द्वारा यह भविष्यवाणी पूरी हुई।
4️⃣ इस्राएलियों का छुटकारा
बाबुल का पतन इसलिए भी हुआ ताकि
👉 परमेश्वर की प्रजा गुलामी से मुक्त हो
👉 यरूशलेम लौटकर मंदिर फिर से बने
📖 यशायाह 45:1
परमेश्वर ने कुरूश को “अपना अभिषिक्त” कहा,
हालाँकि वह यहोवा को नहीं जानता था।
5️⃣ परमेश्वर राज्यों को उठाता और गिराता है
📖 दानिय्येल 2:21
“वह समय और काल बदल देता है; वह राजाओं को हटाता और राजाओं को बैठाता है।”
➡️ कसदियों का राज्य परमेश्वर की दृष्टि में समाप्त हो चुका था।
• बाबुल का पतन पाप और घमंड के कारण हुआ
• परमेश्वर का वचन कभी टलता नहीं
• फारसी केवल एक साधन थे
• परमेश्वर इतिहास का मालिक है
📖 यिर्मयाह 29:11
“मेरी कल्पनाएँ शांति की हैं, हानि की नहीं…”
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परमेश्वर का अंतिम शब्द: ❌ न्याय नहीं ✅ आशा
🙏 निष्कर्ष
प्रिय भाइयों और बहनों,
यदि आज आप किसी के दौर में हैं —
• अनुशासन में
• टूटन में
• प्रतीक्षा में
तो याद रखिए: 👉 परमेश्वर ने आपको छोड़ा नहीं है।
✝️ प्रार्थना
हे पिता परमेश्वर,
हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं।
हमें सिखा कि हम तेरी चेतावनी को हल्का न लें।
हमारे जीवन के हर बंधन को
तू अपने समय पर खोल।
और हमारे दुःख को
गवाही में बदल दे।
यीशु मसीह के नाम में,
आमीन।

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