परमेश्वर पर भरोसा करना - TRUSTING IN GOD

यीशु के लहू में हर पाप को ढांकने की शक्ति है, परन्तु उद्धारकर्ता को अस्वीकार करने वालों के लिए क्रोध है। परमेश्वर दया करने से प्रीति रखता है, परन्तु दुष्ट दण्ड पाए बिना न रहेंगे। परमेश्वर का न्याय उचित तथा उसकी दया एक वरदान है। जो कुछ परमेश्वर अनुशंसित करता है वह आपको अनुशंसित करना चाहिए तथा जिसकी वह निंदा करता है उसकी आपको भी निंदा करनी चाहिए।


परमेश्वर का वचन 

भजन संहिता 37:28

क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा।

आमोस 5:15

बुराई से बैर और भलाई से प्रीति रखो, और फाटक में न्याय को स्थिर करो;

भजन संहिता 89:14

तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।

भजन संहिता 111:7

सच्चाई और न्याय उसके हाथों के काम हैं; उसके सब उपदेश विश्वासयोग्य हैं,

नीतिवचन 21:15

न्याय का काम, करना धर्मी को तो आनन्द, परन्तु अनर्थकारियों को विनाश ही का कारण जान पड़ता है।

यशायाह 56:1

यहोवा यों कहता है, न्याय का पालन करो, और धर्म के काम करो; क्योंकि मैं शीघ्र तुम्हारा उद्धार करूंगा, और मेरा धर्मी होना प्रगट होगा।

यूहन्ना 9:39

तब यीशु ने कहा, मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूं, ताकि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अन्धे हो जाएं।

प्रार्थना

   हे प्रभु ( तेरा वचन कहता है, क्या सारे संसार का न्यायी? वही नहीं करेगा जो उचित है? मैं धन्यवाद करता हूँ कि तू न्यायी परमेश्वर है और जो दया में मगन होता है। तेरे पुत्र के बलिदान के द्वारा नम्र लोग तेरी दया प्राप्त करें, तो भी तू विद्रोहियों को दोषी ठहराता है। एक दिन सारे दुष्ट काम प्रकट किये जाएंगे ताकि तुझसे कोई भी बचं न सकेगा। तेरी आँखों के सामने सब कुछ बेपर्दा और स्पष्ट है। मैं जानता हूँ कि हर एक व्यक्ति तेरे न्याय आसन के सम्मुख खड़ा होगा, कुछ तेरी दया पाने तथा कुछ तेरे क्रोध का सामना करने के लिए। हे प्रभु मुझे अपनी पवित्रात्मा से भर दे, ताकि जो कुछ तू पसन्द करें वही मैं पसन्द करूं और जो कुछ तुझे नापसन्द हो मुझे भी नापसन्द हो। मैं आनंदित हूँ कि तू न्यायी परमेश्वर है जिसका हृदय दया से भरा है, घात किया हुआ मेमना योग्य है! ( इस प्रार्थना को यीशु मसीह के नाम से मांगते हैं, आमीन )