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सेवक से बाइबिल क्या कहती है ?

What does the Bible say about servants?


एक सेवक के रूप में आपकी बुलाहट क्या है ?

What Is Your Calling As A Servant ?

1. आप का चुनाव स्वयं परमेश्वर द्वारा किया गया हैं।

2. आप यीशु मसीह द्वारा चुने गए हैं।

3. आप परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा चुने गए हैं।

4. आप को विश्वासयोग्य ठहराया गया हैं मसीह द्वारा विश्वासयोग्य ठहराया गया हैं।

5. आप परमेश्वर के अनुग्रह के वरदान द्वारा एक सेवक होने के लिए बुलाए गए हो।

6. आप परमेश्वर के एक भंडारी एक सेवक - होने के लिए बुलाए गए हैं।

7. आप मसीह के लिए एक राजदूत होने के लिए बुलाए गए हैं।


1. आप का चुनाव स्वयं परमेश्वर द्वारा किया गया हैं।

   "यहोवा की वाणी हैं कि तुम मेरे साक्षी हो और मेरे दास हो, जिन्हें मैं ने इसलिए चुना हैं कि समझकर मेरी प्रतीति करो और यह जान लो कि मैं वही हूं; मुझ से पहिले कोई ईश्वर न हुआ और न मेरे बाद भी कोई होगा" (यशा 43:10)।

"आमोस ने उत्तर देकर अमस्याह से कहा, मैं न तो भविष्यवक्ता था, और न भविष्यवक्ता का बेटा; मैं तो गाय - बैल का चरवाहा और गूलर के फलों का संग्रहकर्त्ता था; और यहोवा ने मुझे झुंड के पीछे पीछे फिरने से बुलाकर कहा, जा, मेरी प्रजा इस्त्राएल से भविष्यवाणी कर" (आमोस 7:14-15)।

"एक मनुष्य परमेश्वर द्वारा भेजा गया था, जिसका नाम यूहन्ना था” (यूह. 1:6)।

विचार
    यह पिता परमेश्वर हैं - एक मात्र जीवित और सच्चा परमेश्वर, विश्व का सर्वप्रभु और राजा - जिस ने आप को बुलाया और चुना हैं एक सेवक होने के लिए। समस्त संसार में आप को सब से बड़ा अधिकार दिया गया हैंः स्वयं यहोवा परमेश्वर द्वारा आप बुलाए और चुने गए हैं एक सेवक होने के लिए।

   "गर्भ में रचने से पूर्व मैं तुझे जानता था; और गर्भ से बाहर निकलने से पूर्व मैंने तुझे पवित्र किया, और मैंने तुझे जातियों का भविष्यवक्ता ठहराया। तब मैं ने कहा, हाय, प्रभु परमेश्वर! देख, मैं बोल नहीं सकताः क्योंकि मैं लड़का ही हूँ। परन्तु यहोवा ने मुझ से कहा, मत कह कि मैं लड़का हूँ: क्योंकि जिस किसी के पास मैं तुझे भेजूं वहां तू जाएगा; और जो कुछ मैं तुझे आज्ञा दूं वही तू कहेगा (यिर्म 1:5-7)।

2. आप यीशु मसीह द्वारा चुने गए हैं।

   "तुम ने मुझे नहीं चुना, परन्तु मैं ने तुम्हें चुना हैं, और ठहराया हैं कि तुम जाकर फल लाओ, और तुम्हारा फल बना रहेः कि जो कुछ तुम मेरे नाम में पिता से मांगो, वह तुम्हें दे" (युह 15:16)।

   "तब यीशु ने उन से फिर कहा, तुम्हें शांति मिलेः जैसे मेरे पिता ने मुझे भेजा, वैसे ही मैं तुम्हें भेजता हूं" (युह 20:21)।

  "और मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी हैं, धन्यवाद करता हूं, कि उस ने मुझे विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिए ठहराया" (1 तीमु. 1:12)।

विचार
   यह जीवित परमेश्वर के पुत्र, मसीह यीशु हैं, जिसने आप के एक सेवक होने के लिए बुलाया और चुना हैं। उसने आप को चुना हैं कि जा कर मनुष्यों के बीच फल उत्पन्न करें। समस्त संसार में आप सब से अधिक विशेषाधिकृत व्यक्ति हैं: आप एक सेवक होने के‌ लिए चुने गए हैं - स्वयं परमेश्वर के पुत्र द्वारा।

3. आप परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा चुने गए हैं।

   "इसलिए अपनी और पूरे झुंड की चौकसी करो, जिस पर पवित्र आत्मा ने तुम्हें अध्यक्ष ठहराया हैं, कि तुम परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उस ने अपने लोहू से मोल लिया हैं" (प्रेरि. 20:28)।

   "क्या तुम नहीं जानतें, कि तुम्हारी देह पवित्रआत्मा का मंदिर हैं; जो तुम में बसा हुआ हैं और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला हैं और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिए गए हो; इसलिए अपनी देह में, और अपनी आत्मा में, जो परमेश्वर के हैं, परमेश्वर की महिमा करो" (1) कुरि. 6:19-20)।

विचार
   यह परमेश्वर का पवित्र आत्मा हैं जिस ने आप को एक सेवक होने के लिए बुलाया हैं। आप को उस ने चुना हैं जिस से कि वह आप के भीतर वास करे- आप को चुना हैं उसका औजार, उसकी वाहिका, उसका व्यक्ति होने के लिए जिस के द्वारा वह पृथ्वी पर जी सके और कार्य कर सके।

*    पवित्र आत्मा आपके शरीर और जीवन का उपयोग करना चाहता हैं यह दर्शाने के लिए कि एक व्यक्ति को पृथ्वी पर किस प्रकार जीना हैं।

*    पवित्रआत्मा आप को मसीह की समानता में बनाना चाहता हैं जगत के लिए आप को एक नमूना बनाना चाहता हैं, एक नमूना कि किस प्रकार परमेश्वर चाहता हैं कि लोग जिए: सब पवित्रता और धार्मिकता में।

*    पवित्रआत्मा आप का उपयोग करना चाहता हैं यीशु मसीह के महिमामय सुसमाचार का प्रचार करने और शिक्षा देने के लिए।

   समस्त संसार में आप को सबसे महिमामय विशेषाधिकार दिया गया हैं। आप परमेश्वर के पवित्रआत्मा द्वारा बुलाए और चुने गए होः आप को उसी प्रकार जीने के लिए बुलाया गया हैं जिस प्रकार मसीह जीता था एक पवित्र और धर्मी जीवन - और आप बुलाए गए हैं मसीह के सुसमाचार का प्रचार करने के लिए एक जगत में जो कि खोया हुआ और भारी आवश्यकता के भार के नीचे दबा हुआ हैं।

4. आप को विश्वासयोग्य ठहराया गया हैं मसीह द्वारा विश्वासयोग्य ठहराया गया हैं।


   "और मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी हैं, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिए ठहराया" (1 तीमु 1:12)।

   "फिर यहां भंडारी में यह बात देखी जाती हैं, कि विश्वासयोग्य निकले" (1 कुरि 4:2)।

   "जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्ध (भंडारीपन भरोसा) के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिए मुझे सौंपा गया, कि परमेश्वर के वचन को पूरा करूं" (कुलु 1:25)।

   "मैं ने प्रभु की वाणी को यह कहते हुए भी सुना, कि मैं किसे भेजूं, और हमारे लिए कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूँ, मुझे भेज" (यशा 6:8)।

विचार
   यह एक अति अद्भुत विचार हैं, कि मसीह यीशु आप को विश्वासयोग्य समझता हैं (1 तीमु. 1:12)। वह आप पर भरोसा रखता हैं विश्वासयोग्य रहने के लिए, और अंतिम विश्लेषण में वह जानता हैं कि आप उस के प्रति विश्वासयोग्य रहेंगे। यह उन कारणों में से एक हैं जिस लिए उस ने आप को चुना हैं और सेवकाई में रखा हैं।

   "सामर्थ दी" वचन पर ध्यान दें। इस का अर्थ बल और शक्ति हैं। आप की सेवकाई की सामर्थ मसीह से आती हैं। सेवा करने और सब पर विजय पाने के लिए मसीह आप को सामर्थ देता हैं। आप को सदा यह स्मरण रखना हैं:

*    चाहे जिस का सामना आप को करना पड़े या कितने नीचे आप गिर जाएं, मसीह आप को विश्वासयोग्य समझता हैं। मसीह जानता हैं कि आप उठोंगे और नए जोश से फिर से सेवा करना आरम्भ करोगे।

    यही कारण हैं कि मसीह ने आप को बुलाया है: क्योंकि अंतिम विश्लेषण में आप विश्वासयोग्य रहोगे। इसे आप कैसे जान सकते और इसके विषय में कैसे विश्वस्त हो सकते हैं? क्षमा और मसीह की सामर्थ और विश्वासयोग्यता के कारण। मसीह आप को उठाएगा। इसलिए जब आप गिरते हो, तो आप को उठकर मसीह की क्षमा को खोजना हैं और मसीह के बल और सामर्थ में फिर से चलना हैं।

5. आप परमेश्वर के अनुग्रह के वरदान द्वारा एक सेवक होने के लिए बुलाए गए हो।

   "और मैं परमेश्वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार जो उसकी सामर्थ के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना। मुझ पर, जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से भी छोटा हूं, यह अनुग्रह हुआ, कि मैं अन्यजातियों को (अविश्वासियों को) मसीह के अगम्य धन का सुसमाचार सुनाऊं" (इफि 3:7-8)।

"मनुष्य हमें मसीह के सेवक और परमेश्वर के भेदों के भंडारी समझे" (1 कुरि 4:1)।

विचार
   आप को मसीह के एक सेवक होने के लिए बुलाया गया हैं (1 कुरि 4:1)। चार महत्वपूर्ण तथ्यों पर ध्यान दें।

अ)    "सेवक" शब्द का अर्थ हैं एक "नीचे का नाव खेनेवाला।" यह उन दासों के संदर्भ में हैं जो बड़े जहाजों के निचले भाग में बैठकर पतवारों को चलाते थे समुद्र में से जहाज को आगे बढ़ाने के लिए। मसीह जहाज का स्वामी हैं और सेवक मसीह के दासों में से एक हैं। ध्यान देः नीचे खेनेवाले अनेक सेवकों में आप केवल एक हैं। यह भी स्मरण रखें की जहाज के निचले भाग में दास जंजीरों द्वारा बंधे थे। उन को जहाज के स्वामी की सेवा करने के अतिरिक्त और कुछ करने की अनुमति नहीं थी। आप मसीह के एक बंधक दास होः आप का अस्तित्व केवल स्वामी के लिए खेने के लिए हैं। आप किसी अन्य की सेवा नहीं करते और न कर सकते हैं।

आ)    परमेश्वर ने आप पर अपने अनुग्रह को निछावर किया हैं और आपको एक सेवक बनाया हैं (इफि 3:7-8)। परमेश्वर ने आप पर दया की हैं, और आप को अत्याधिक क्षमा किया हैं। आप अपने जीवन के लिए परमेश्वर के ऋणी हैं, मसीह के अगम्य धन का प्रचार करने के लिए। किसी भी व्यक्ति को इस से बड़ी बुलाहट और विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता हैं।

इ) आपकी महानतम् महिमा परमेश्वर की बुलाहट और परमेश्वर का कार्य हैं। यह अवश्य ही पौलुस के विषय में सत्य था (इफि. 3:7-8)। पौलुस ने सेवकाई के सम्मान को देखा, परमेश्वर द्वारा विशेष रूप से चुने जाने के सम्मान को। विलियम बार्कले दर्शाता हैं कि पौलुस के लिए सेवकाई एक ज्वलन्त विशेषाधिकार था। पौलुस को एक सेवक होने के लिए परमेश्वर को आग्रह नहीं करना पड़ा। किसी को भी आग्रह नहीं करना पड़ा कि पौलुस शिक्षा दे (इफि 4:1); गाए (इफि 5:19); परमेश्वर के लिए बोल (इफि 4:17); मिलने जाए (2) कुरि. 13:1)1 पौलुस को विवश नहीं करना पड़ा। उसने एक सेवक होने की उसकी बुलाहट को सब विशेषाधिकारों में महानतम् के रूप में देखा। परमेश्वर के एक सेवक के रूप में, आप को उस महान विशेषाधिकार को देखना हैं जो मसीह की सेवा करने में आपका हैं (गलतियों और इफिसियों की पत्रियां)।

ई) एक सेवक और प्रचारक होने की आप की बुलाहट एक दान हैं, परमेश्वर के अनुग्रह का एक मुफ्त दान। यही बात तो पौलुस कहता हैं (इफि 3:7-8)। परमेश्वर को बुलाने का अधिकार था पौलुस को क्योंकि परमेश्वर के पास सब अधिकार हैं। परमेश्वर परमेश्वर हैं। पौलुस में कोई योग्यता, कोई मूल्य नहीं था जिस के कारण परमेश्वर ने उसे एक सेवक और एक प्रचारक के रूप में चुना। पौलुस केवल आश्चर्य से कहता हैं, "कैसा विशेषाधिकार, कैसा उत्तरदायित्व! सेवकाई और प्रचार करने के लिए परमेश्वर द्वारा छोटों में से भी छोटा बुलाया गया !"

   मसीह में उध्दार पौलुस के एक सेवक बनने का कारण बना (इफि 3:7)।

*    मसीह में उध्दार पौलुस के एक प्रचारक बनने का कारण बना। पौलुस की अति दीनता पर ध्यान दें। उस के पास वह था जिस की हम सब को आवश्यकता हैः परमेश्वर के समक्ष एक गहरा, तीव्र अयोग्यता का अहसास।

   परमेश्वर के एक सेवक के रूप में आप के पास सब बुलाहटों में महान बुलाहट हैं। आप को सर्वोच्च विशेषाधिकार दिए गए हैं। परमेश्वर ने उसके अनुग्रह को आप पर निछावर किया हैं और आप को उसका सेवक होने के लिए बुलाया हैं एक जगत के लिए जो दुःख और मृत्यु के बोझ के नीचे दबा हैं।

6. आप परमेश्वर के एक भंडारी एक सेवक - होने के लिए बुलाए गए हैं।

   "मनुष्य हमें मसीह के सेवक और परमेश्वर के भेदों के भंडारी समझे" (1 कुरि 4:1)।

   "क्योंकि अध्यक्ष (सेवक) को परमेश्वर का भंडारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए" (तीतु 1:7)।

   "जिस को जो वरदान मिला हैं वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भंडारियों की नाई एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पत 4:10)।

विचार
   आप परमेश्वर के भंडारी हैं। “भंडारी" शब्द ("ओइकोनोमोस") का अर्थ हैं एक संपत्ति का पर्यवेक्षक । भंडारी सदा एक दास था एक स्वामी के अधीन, परन्तु स्वामी के संपूर्ण घर या संपत्ति पर अन्य दासों पर प्रभारी बनाया जाता था। वह कर्मचारियों का नियंत्रण करता और स्वामी के लिए संपूर्ण कार्य चलाता था। उसे दूसरों पर नियुक्त किया गया था, परन्तु वह स्वयं स्वामी का एक दास था। उसके कार्य का सूक्ष्मता से सर्वेक्षण नहीं किया जाता था; इसलिए उसे विश्वासयोग्य और उत्तरदायी होना होता था।

   यह ध्यान दें कि एक सेवक किस के ऊपर एक भंडारी बनाया जाता हैंः परमेश्वर के रहस्यों पर। एक रहस्य कोई ऐसी बात नहीं हैं जिसे समझना कठिन हैं। इस की अपेक्षा, यह कुछ ऐसी बात हैं जिसे छिपा कर गुप्त रखा गया हैं। यह कुछ ऐसी बात हैं जो मानवीय समझ द्वारा खोजी नहीं जा सकती थी, परन्तु अब परमेश्वर द्वारा प्रकट की गई हैं। जिन पर यह प्रकट की गई हैं उन के लिए यह अत्यन्त स्पष्ट हैं, परन्तु जो उसे ग्रहण नहीं करते उनके लिए यह पूर्णतः अजनबी हैं। परमेश्वर के रहस्य क्या हैं? वे सत्य हैं परमेश्वर के वचन के - महिमामय सत्य। वे कौन हैं जिन पर ये रहस्य प्रकट होते हैं? भंडारियों, सेवकों, मसीह पर विश्वास करनेवाले दासों पर।

   परमेश्वर के एक सेवक के रूप में, आप का उच्च सम्मान होना हैं आप के कार्य के लिए। आप परमेश्वर के केवल एक दास हैं, परन्तु आप वह दास हैं जिसे परमेश्वर ने उस के घराने पर, उसकी कलीसिया और उस के लोगों पर भंडारी बनाया हैं। परमेश्वर द्वारा आप का सम्मान किया गया हैं: आप को परमेश्वर के अविनाशी रहस्यों के लिए, परमेश्वर के पवित्रवचन के महान सत्यों के लिए उत्तरदायी बनाया गया हैं। आप पैसे या संपत्ति जैसी नाशमान वस्तुओं से नहीं निपटते, परन्तु स्वयं परमेश्वर की अनन्त बातों से, उन अनन्त सत्यों से जिन को परमेश्वर चाहता हैं कि संसार पर घोषित किए जाएं।

7. आप मसीह के लिए एक राजदूत होने के लिए बुलाए गए हैं।

   "और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेलमिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी हैं। अर्थात् परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेलमिलाप का वचन हमें सौप दिया हैं। सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानों परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेलमिलाप कर लो" (2 कुरि 5:18-21)।

विचार
परमेश्वर ने आप को जगत के लिए उस का राजदूत होने के लिए बुलाया हैं। उस ने आप को परमेश्वर के संदेश को जगत को देने की सेवकाई दी हैं, जो कि मेलमिलाप का संदेश हैं। इस से बड़ी बुलाहट कभी भी नहीं दी जा सकती; इस से उच्चतर पद कभी भी रखा नहीं जा सकता हैं। दो महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान दें।

अ)    आप को सर्वोच्च पदवी दी गई है: आप "मसीह के राजदूत" हैं। "राजदूत" (प्रेसबीओमेन) वह व्यक्ति हैं जो भेजनेवाले का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक शासकीय दूत के विषय में भेजा जाता है और भेजनेवाले के संदेश की उद्घोषणा करने के लिए। राजदूत के विषय में चार बातें सदा सत्य हैं।

*    आप उसके हो जिस ने आप को भेजा हैं।

*    आप को भेजे जाने के लिए नियुक्त किया गया हैं। आप का अस्तित्व केवल उसी उद्देश्य के लिए हैं जिस के लिए आप भेजे गए थे।

   आप के पास जिस ने आप को भेजा हैं उस का संपूर्ण अधिकार और सामर्थ हैं।

*    आप को भेजनेवाले के संदेश के साथ भेजा गया हैं। संदेश आपका नहीं हैं।

ब)    आप को सबसे महान संदेश दिया गया है: "परमेश्वर के साथ मेलमिलाप कर लो।" संदेश इतना महत्वपूर्ण हैं कि आप को मनुष्यों से "निवेदन" (डिओमेथा) करना है: याचना, मनाना, पुकारना और विनती करना हैं कि वे परमेश्वर से मेल मिलाप कर लें।

   ध्यान दें कि यह "मसीह के लिए" ही आप को मनुष्यों से विनती करना है। मसीह ने मनुष्यों के लिए मेलमिलाप उपलब्ध कराने के लिए अंतिम मूल्य चुका दिया हैंः उस ने मनुष्यों के पापों को स्वयं पर ले लिया और उन की दण्डाज्ञा को लिया है। क्योंकि उसने इतना अधिक किया, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के लिए मसीह का ऋणी है - प्रत्येक व्यक्ति को परमेश्वर के साथ मेल मिलाप करना चाहिए। मसीह के लिए, एक व्यक्ति को स्वयं को परमेश्वर को देना चाहिए।