हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! भजन संहिता 39:4
मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं; भजन संहिता 119:19
पृथ्वी पर हमारे जीवन के कार्य अस्थाई कार्य हैं:
बाइबल ऐसे अनेक दृष्टान्तों से भरी हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के संक्षिप्त, अस्थाई और अल्पकालिक स्वभाव की शिक्षा देती है। जीवन की व्याख्या एक धुंध, एक तेज धावक, एक सांस, और एक धुएं के गुब्बार के रूप में की गई है। बाइबल कहती है "क्योंकि हम तो कल ही के हैं, और कुछ नहीं जानते; और पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान बीतते जाते हैं।"
अपने जीवन का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए आपको दो सत्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए: पहला, चूंकि जीवन बहुत छोटा है अतः इसकी तुलना अनन्त काल से करना। दूसरा, पृथ्वी सिर्फ एक अस्थाई निवास स्थल है। आप यहाँ अधिक देर तक नहीं रहेंगे। इसलिए इससे अधिक न जुड़ें। परमेश्वर से माँगें कि वह आपकी सहायता करें कि आप पृथ्वी पर जीवन को वैसे ही देख सकें, जैसे वे स्वयं देखते हैं। दाऊद ने विनती की थी, “हे यहोवा, ऐसा कर की मेरा अन्त मुझे मालूम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिससे मैं जान लूँ कि मैं कैसा अनित्य हूँ।"
बाइबल में पृथ्वी पर के जीवन की तुलना बार-बार विदेश के अस्थाई निवास से की गई है। यह आपका स्थाई निवास या अन्तिम पड़ाव नहीं है। आप सिर्फ इसकी यात्रा पर हैं, आप पृथ्वी पर यात्री हैं। बाइबल में पृथ्वी पर हमारे अल्प प्रवास के लिए ये शब्द उपयोग किए गए हैं: तीर्थ यात्री, विदेशी, अजनबी, आगन्तुक और यात्री । राजा दाऊद ने कहा, "मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूँ" पतरस ने कहा, "और जब कि तुम 'हे पिता' कहकर उससे प्रार्थना करते हो, जो बिना पक्षपात हर एक के काम के अनुसार न्याय करता है, तो अपने परदेशी होने का समय भय से बिताओ।"
कैलीफोर्निया में, जहाँ मैं रहता हूँ, अनेक लोग विश्व के दूसरे स्थानों से काम करने आते हैं, किन्तु वे अपने देश की नागरिकता नहीं छोड़ते हैं। यहाँ रहने के लिए उन्हें ("ग्रीन कार्ड" ) रखना पड़ता है, जिसके कारण वे यहाँ के नागरिक न होने पर भी यहाँ कार्य कर सकते हैं। स्वर्ग की अपनी नागरिकता को याद रखने के लिये यह जरूरी है कि एक मसीही अपना आत्मिक ग्रीन कार्ड सदैव अपने पास रखें। "उनका अन्त विनाश है, उनका ईश्वर पेट है, वह अपनी लज्जा की बातों पर घमण्ड करते हैं और पृथ्वी की वस्तुओं पर मन लगाए रहते हैं। पर हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की बाट जोह रहे हैं।" मसीह यीशु के वास्तविक विश्वासी जानते हैं कि पृथ्वी पर उनके प्रवास के कुछ वर्षों के अतिरिक्त, जीवन कुछ और भी है।
आपकी पहचान अनन्तकाल में है, और आपका वास्तविक घर स्वर्ग में। जब आप इस सत्य को समझ जाते हैं तब आप पृथ्वी पर "सब कुछ पाने " की चिन्ता करना छोड़ देते हैं। यहाँ और अभी इस संसार के सिद्धान्तों, प्राथमिकताओं और जीवन शैली को अपनाकर जीने के खतरों के बारे में परमेश्वर का रुख एक दम सीधा-सादा है। जब हम संसार के प्रलोभनों से दिल लगाने लगते हैं, तो परमेश्वर उसे आत्मिक व्यभिचार कहते हैं। बाइबल कहती है, "हे व्यभिचारणियों, क्या तुम नहीं जानती कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है? अतः जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आपको परमेश्वर का बैरी बनाता है।"
सोचिये, यदि आपका देश आपको किसी शत्रु देश में अपने राजदूत के रूप में जाने के लिए कहे। तो सम्भवतः अपने लक्ष्य की पूर्ति और नम्र स्वभाव बनाए रखने के लिए आपको नई भाषा सीखनी पड़े और वहाँ के रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मतभेदों को अपनाना पड़े। एक राजदूत के रूप में आप स्वयं को शत्रु से अलग नहीं कर पायेंगे। अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए आपको उनसे सम्पर्क भी स्थापित करना पड़ेगा और सम्बन्ध भी स्थापित करना पड़ेगा।
किन्तु यदि इस विदेश में आपको अच्छा लगने लगे और आपको उससे प्रेम हो जाए, तो आपकी निष्ठा और समर्पण में परिवर्तन आ जाएगा। राजदूत के रूप में आपकी भूमिका के साथ समझौता हो जाएगा। स्वदेश का प्रतिनिधित्व करने के बदले आप शत्रु के समान व्यवहार करने लगेंगे। आप देश द्रोही हो जाएंगे।
बाइबल कहती है, “इसलिए हम मसीह के राजदूत हैं। बात तो यह है कि अनेक मसीहीयों ने अपने राजा और उसके राज्य दुःख की को धोखा दिया है। उन्होंने मूर्खतापूर्वक ये मान लिया कि चूंकि वे इस धरती पर रहते हैं इसलिये ये धरती ही उनका घर है। जबकि ऐसा नहीं है। बाइबल स्पष्ट है, “हे प्रियों, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।" परमेश्वर ने हमें बहुत स्पष्ट रूप से ये चेतावनी दी है कि, हम अपने चारों ओर के मोह में न फसें क्योंकि वह सब अस्थाई है। हमें स्मरण कराया गया है, “और इस संसार के साथ व्यवहार करने वाले ऐसे हों, कि संसार ही के न हो लें; क्योंकि इस संसार की रीति और व्यवहार बदलते जाते हैं।"
पूर्व शताब्दियों की तुलना में पश्चिमी देशों का जीवन उतना सुगम कभी भी नहीं रहा। हम लगातार मनोरंजन करते रहे, खुश रहे और अपनी आवश्यकताओं को पूरा करते रहे। आज उपलब्ध मनमोहक, आकर्षण, मंत्रमुग्ध मीडिया, और मजेदार अनुभवों के साथ ये भूल जाना सरल है कि सुख की खोज ही ये जीवन नहीं है। हम जब केवल इतना याद रखते हैं कि जीवन एक परीक्षा, भरोसा और एक अस्थाई कार्य है तो हमारे जीवन पर इन बातों का असर कम हो जाता है। हमारी तैयारी उससे भी कहीं ज्यादा बेहतर की है। "और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं; क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती हैं।"
मसीह यीशु के अनुयायियों के रूप में हम इस जगत में समस्याओं, दुखों और तिरस्कारों का सामना करते हैं जो इस सत्य को बताते हैं कि पृथ्वी हमारा स्थायी निवास नहीं है। "इससे यह भी स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की कुछ प्रतिज्ञायें क्यों अधूरी लगती हैं, कुछ प्रार्थनाएँ क्यों अनुत्तरित लगती हैं और कुछ परिस्थितियां क्यों अनुचित लगती है। यह कहानी का अन्त नहीं है।
पृथ्वी के मोह से दूर रखने के लिए ही परमेश्वर हमें जीवन में पर्याप्त मात्रा में असंतोष और निराशा का अहसास होने देते हैं। अनन्त-काल के इस तरफ इस धरती पर हमारी लालसाएँ कभी पूरी नहीं होंगी। हम यहाँ पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकते क्योंकि हम यहाँ के नहीं है! पृथ्वी हमारा अंतिम पड़ाव नहीं है; हमें उससे कहीं ज्यादा उत्तमता के लिए रचा गया है।
एक मछली को सूखी भूमि पर रहना
कभी भी अच्छा नहीं लगता, क्योंकि उसे जल में रहने के लिए बनाया गया है। एक पक्षी का उड़ना रोक दिया जाए तो वह कभी संतुष्ट महसूस नहीं करेगा। पृथ्वी पर आप स्वयं को कभी भी संतुष्ट नहीं पाएंगे, क्योंकि आपको इससे अधिक संतुष्टि के लिए बनाया गया है। आप यहाँ सुख भोग सकते हैं, किन्तु वह उसकी तुलना में कुछ भी नहीं है, जो परमेश्वर ने आपके लिए तैयार किया है।
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यह समझ जाना कि पृथ्वी पर आपका जीवन अस्थाई है, आपकी सोच एवं मूल्यों को परिवर्तित कर देगा। अनन्त मूल्य आपके सभी निर्णयों में निर्णायक बन जायेगा न कि अस्थाई मूल्य। जैसा कि सी. एस. लुइस ने कहा है, “जो अनन्त नहीं है, वह अन्ततः बेकार है।" बाइबल कहती है, “और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं; क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती है।"
जिस प्रकार संसार ये बताता है कि हमारे जीवन के लिए परमेश्वर का लक्ष्य सम्पत्ति या ख्याति अर्जित करना है, एक विनाशकारी गलती है। परिपूर्ण जीवन का भौतिक सुख से कोई सम्बन्ध नहीं है और परमेश्वर के प्रति निष्ठा जीवन या सेवकाई में सफलता का आश्वासन नहीं है। अस्थाई सफलताओं पर ध्यान मत लगाओ।"
पौलुस निष्ठावान थे किन्तु फिर भी उनका अन्त बन्दी - ग्रह में हुआ। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले निष्ठावान थे, मगर उनका सिर काटा गया। लाखों निष्ठावान विश्वासियों को शहीद होना पड़ा, उन्होंने सब कुछ खो दिया, या जीवन के अन्त में उनके पास दिखाने के लिए कुछ भी न था किन्तु जीवन का अन्त, अन्त नहीं है!
परमेश्वर की दृष्टि में महान विश्वासी नायक वो नहीं है, जिन्होंने जीवन में अपार सम्पत्ति, सफलता और अधिकार अर्जित किया है, परन्तु वे हैं, जो इस जीवन को अस्थाई कार्य समझकर विश्वास के साथ सेवकाई करते और अनन्तकाल में अपनी प्रतिज्ञा किया हुआ ईनाम पाते हैं। बाइबल हमें परमेश्वर की ख्याति के बारे में बताती है कि, "ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ नहीं पाई, पर उन्हें दूर से देखकर आनन्दित हुए और मान लिया कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। पर वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गीय देश के अभिलाषी हैं; इसीलिए परमेश्वर उनका परमेश्वर कहलाने में उनसे नहीं लजाता, क्योंकि उसने उनके लिये एक नगर तैयार किया है।" पृथ्वी पर आपका जीवन आपकी पूर्ण जीवन कथा नहीं है। अगले अध्यायों के लिए आपको स्वर्ग जाने तक प्रतीक्षा अवश्य करनी है। पृथ्वी पर विदेशी के रूप में जीने के लिए विश्वास की आवश्यकता है।
एक पुरानी कहानी जो बार-बार दोहराई जाती है कि, एक मिशनरी सेवा से अवकाश प्राप्त कर लौट रहे थे। जिस जलयान में वो थे, उसी में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति भी थे। उत्साहित भीड़, फौजी बैंड, लाल-कालीन, और पत्रकारों ने राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया किन्तु मिशनरी की ओर किसी का भी ध्यान नहीं गया। आत्म-ग्लानि और कुढ़न से पीड़ित होकर मिशनरी परमेश्वर से शिकायत करने लगे। तब परमेश्वर ने प्यार से मिशनरी को स्मरण कराया, "मेरे बेटे, तुम अभी घर नहीं पहुँचे हो।"
स्वर्ग में आपका प्रवेश आपके यह पुकारने के दो सैकण्ड पहले नहीं होगा, "मैंने उन वस्तुओं को इतना अधिक महत्व क्यों दिया जो अस्थाई थी? मैं क्या सोच रहा था? मैंने इतना समय, शक्ति और नश्वर चिन्ताओं में व्यर्थ क्यों गँवाया?"
जब जीवन कठिन हो जाता है, जब आप संदेह के कारण उतावले होते हैं, या जब आप यह सोचते हैं कि मसीह के लिए जीवन व्यतीत करना उचित है या नहीं, तो याद कीजिए कि अभी आप घर नहीं पहुँचें हैं। मृत्यु के समय आप घर छोड़ेंगे नहीं-किन्तु घर जायेंगे।
छठा दिन
अपने उद्देश्य के बारे में सोचना
विचार करने का अंश: ये दुनिया मेरा घर नहीं है।
याद करने योग्य पद्यः “और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं; क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती है।" 2 कुरिन्थियों 4:18
सोचने योग्य प्रश्नः यह सत्य कि धरती पर जीवन मात्र एक अस्थाई कार्य है, मेरे जीने की प्रणाली को किस प्रकार परिवर्तित कर सकता है?
दिन छः जीवन एक अस्थाई कार्य है
1. अय्यूब 8:9
2. भजन संहिता 39:4
3. भजन संहिता 119:19
4. 1 पतरस 1:17
5. फिलिप्पियों 3:19-20
6. याकूब 4:4
7. 2 कुरिन्थियों 5:20
8. 1 पतरस 2:11
9. 1 कुरिन्थियों 7:31
10. 2 कुरिन्थियों 4:18
11. यूहन्ना 16:33; 16:20; 15:18-19
12. 2 कुरिन्थियों 4:18
13. 1 पतरस 2:11
14. इब्रानियों 11:13, 16

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