स्वर्ग के बारे में बाइबल क्या कहती है ?
What Does The Bible Say About Heaven ? - Vishwasi Tv
प्रस्तावना
इस अध्याय की सामग्री डी० एल० मूडी उच (MP NO. 5) और दूसरे स्थानों से ली गई है।
कारपैन्टर काओ (पैहनसिएन पश्चिमी चीन) ने कहा, अन्य धर्मों के, लोग नरक के विषय में बहुत अधिक बताते हैं, क्योंकि वे वहीं जा रहे हैं: हम स्वर्ग के विषय में बहुत अधिक बताते हैं, क्योंकि हम वहीं जा रहे हैं।" डी० एल० मूडी के उपदेश का अतिप्रिय विषय "स्वर्ग" होता था। आज हम स्वर्ग के जितने निकट हैं, उतना इससे पहले कभी नहीं थे।
कहानी: एक व्यक्ति उपदेश के समय" आमीन आमीन" चिल्लाता रहता था। बाहर से एक प्रचारक आया था, इसलिए एक व्यक्ति ने उससे कहा कि यदि वह उपदेश के समय चुप रहे तो वह उसे एक जोड़ा बूट देगा। उसने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। प्रचारक ने स्वर्ग पर उपदेश दिया, उसने स्वर्ग के सभी आश्चर्यों का सजीव वर्णन किया, अन्त में वह व्यक्ति अपने आप को नियंत्रित न रख सका और वह चिल्लाने लगा, "बूट दो या मत दो, मैं चिल्लाऊँगा, आमीन, हाल्लेलूय्याह।"
1. स्वर्ग का मूल
इसकी रचना आदि में परमेश्वर द्वारा की गई। उत्पत्ति 1:1, "आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।"
उसने यह रचना कब और कितने समय पहले की यह रहस्य मनुष्य से छिपाकर रखा गया है। स्वर्ग सदा बना रहेगा, 2 कुरिन्थियों 5:1, "परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं, परन्तु चिरस्थायी है।" स्वर्ग एक तैयार किया गया स्थान है (यूहन्ना 14:2), यह तैयार लोगों के लिए है।
2. स्वर्ग क्या है ?
स्वर्ग प्रभु परमेश्वर का निवास स्थान है। मत्ती 6:9, "हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है।" 2 कुरिन्थियों 12:2 एक मनुष्य को तीसरे स्वर्ग तक उठाने के विषय में बताता है। प्रथम स्वर्ग वह क्षेत्र है जहाँ पक्षीगण उड़ते हैं। दूसरा स्वर्ग वह स्थान है जहाँ स्पुतनिक जाते हैं। तीसरा स्वर्ग परमेश्वर का निवास स्थान या प्रभु परमेश्वर का सिंहासन है।
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स्वर्ग एक इमारत है। 2 कुरिन्थियों 5:1, "क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं, परन्तु चिरस्थाई है।"
स्वर्ग परमेश्वर का भवन है। इसको मनुष्य ने नहीं बनाया, 2 कुरि 5:11
स्वर्ग खत्ता कहलाता है। मत्ती 3:12, "अपने गेहूँ को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा।" ऐसा गेहूँ को साफ करने के समय होता है, गेहूँ (भले) स्वर्ग में जाता है और भूसा जला दिया जाता है।
स्वर्ग परमेश्वर और मसीह का राज्य कहलाता है। इफिसियों 5:5, "मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं।"
स्वर्ग पिता का घर कहलाता है। यूहन्ना 14:2, “मेरे पिता के घर में,।”
स्वर्ग विश्राम का स्थान कहलाता है। इब्रानियों 4:9, "सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिए सब्त का. विश्राम बाकी है।"
स्वर्ग को स्वर्ग लोक भी कहा जाता है। 2 कुरिन्थियों 12:4 ऐसे मनुष्य को जानता हूँ (जो) स्वर्गलोक पर उठा लिया गया।"
3. स्वर्ग का आकार
यह असीम है। यिर्मयाह 31: 37, “यहोवा यों भी कहता है, यदि ऊपर से आकाश मापा जाए।" प्रकाशितवाक्य 21:1, "फिर मैंने नए आकाश और नई पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।"
कुछ लोग भूलवश इस अध्याय में दिए गए नए यरूशलेम को स्वर्ग मान लेते हैं। नया यरूशलेम लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई में समान है, अर्थात् 1200... फर्लांग। किसी ने (मेरा अनुमान है कि बॉब रिपले ने) इसका घनमूल निकालकर बताया है कि इसके अन्दर 49, 679, 308, 800, 000, 000, 000 (49 1/2 महाशंख) लोग रह सकते हैं। परन्तु फिर इसमें वृक्षों और जीवन के जल की नदी के लिए स्थान नहीं बचता।
सृष्टि की रचना से 1928 तक 302, 231, 454, 903, 657, 293, 676, 543 मानव उत्पन्न हुए हैं। सृष्टि से वर्तमानकाल तक लगभग 77 पीढ़ियां बीती हैं (42 मसीह से पहले और 35 बाद में)। यदि ये सभी मनुष्य जीवित रहते तो वे पृथ्वी के 113, 326 वर्गमील के गहरे क्षेत्र को घेर लेते।
मसीह से लेकर कोलम्बस तक इतने मनुष्य उत्पन्न हुए जो नए यरूशलेम को भरने के लिए पर्याप्त हैं। मिस्टर रिपले का कथन है कि यदि यही स्वर्ग है तो आप शीघ्र ही अपना आरक्षण करवा लें!
फिर भी मुझे निश्चय है कि यह स्वर्ग नहीं है क्योंकि नया यरूशलेम स्वर्ग से उतरता है, परन्तु वह स्वयं स्वर्ग नहीं है, प्रकाशितवाक्य 21: 2.10। परन्तु स्वर्ग थोड़े लोगों के लिए सीमित है, जो कि शुद्ध और पवित्र है, और इसमें भवन निश्चित रूप में सीमित हैं, इसलिए आज ही एक भवन का आरक्षण कर लेना बुद्धिमत्ता है।
4. स्वर्ग की विशिष्टता
स्वर्ग एक उच्च स्थान है। यशायाह 57:15, "मैं ऊँचे पर और पवित्र स्थान में निवास करता हूँ।"
स्वर्ग एक पवित्र स्थान है। भजन संहिता 20: 6, "वह अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुन कर उसे उत्तर देगा।"
स्वर्ग एक सुखी-स्थान है। प्रकाशितवाक्य 7:17, “परमेश्वर उनकी आँखों से सब आंसू पोंछ डालेगा।"
स्वर्ग एक ऐसा स्थान है जहाँ मृत्यु, आंसू, शोक, चिल्लाना, पीड़ा आदि नहीं है। प्रकाशितवाक्य 21:4, "और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।"
स्वर्ग एक ऐसा स्थान है जहाँ न तो रात है और न अंधकार है: प्रकाशितवाक्य 22:3-5, “फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा।
"स्वर्ग एक ऐसा स्थान है जहाँ भूख प्यास और अधिक गर्मी नहीं है। प्रकाशितवाक्य 7:16. " वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे और न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी।" न ही वहाँ कैनेडा या जम्मू कश्मीर के समान अधिक ठंड होगी।
5. स्वर्ग के निवासी
1) नकारात्मक
क) शैतान वहाँ कभी प्रविष्ट न होगा; प्रकाशितवाक्य 20:10
ख) चोर वहाँ कभी प्रवेश न कर सकेंगे; लूका 12:33।
ग) प्रकाशितवाक्य 21:8, "पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्हों और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग" उसमें न होगा।
घ) गलातियों 5:19-21, शरीर के 17 फल स्वर्ग की सिद्धता में कभी प्रवेश न करेंगे।
2) सकारात्मकः
क) पिता परमेश्वर वहाँ रहता है; मत्ती 6:91
ख) यीशु स्वर्गारोहण के पश्चात वहाँ गया; प्रेरितों के काम 3:21।
ग) स्वर्गदूत, करोड़ों की संख्या में रचे गए ये प्राणी वहाँ हैं; मत्ती 26:53 1
घ) हनोक और एलिय्याह जिनको जीवित ही उठा लिया गया था, वहाँ हैं, उत्पत्ति 5:24; मत्ती 17:3; 2 राजा 2:11।
च) वे सब जो मसीह पर विश्वास करते हुए मरे वहाँ होंगे। 1 थिस्सलुनीकियों 4:14, "तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।"
छ) मूसा जिसको परमेश्वर ने मिट्टी दी, वहाँ है; मत्ती 17:3।
6. स्वर्ग एक सिद्ध स्थान है - प्रकाशितवाक्य 22:1-5
यह सामग्री एच डब्ल्यू. पीलर, मिलर मैमोरियल बाइबल इन्स्टीट्यूट से ली गई है।
1) एक सिद्ध सन्तोष का स्थान, प्रकाशितवाक्य 22:1, 2, जीवन जल की एक शुद्ध सरिता, एक वृक्ष जिसमें बारह प्रकार के फल लगते हैं। यह एक सिद्ध सुख और चैन का चित्र है।
2) सिद्ध व्यवस्था सम्पन्न स्थान, प्रकाशितवाक्य 22:2, वृक्षों की पत्तियां सभी जातियों को आरोग्यता प्रदान करने के लिए। सभी कुछ भला और उत्तम, सभी को उपलब्ध।
3) एक सिद्ध पापरहित स्थान, प्रकाशितवाक्य 22:3, अब कोई पाप नहीं। अदन का शाप सदा के लिए मनुष्य पर से हटा दिया गया। क्या आप ऐसे महान आनन्द की कल्पना कर सकते हैं?
4) एक सिद्ध शासन का स्थान प्रकाशितवाक्य 22:3, परमेश्वर, धर्मीजन, और मेम्ने का शासन।
5) एक सिद्ध सेवा का स्थान, प्रकाशितवाक्य 22:3, “और उसके दास उसकी सेवा करेंगे।" क्या यह विचार स्वर्ग के चित्र को विकृत करता है? निश्चय ही नहीं। हम आनन्द से सेवा करते हैं।
6) सिद्ध संगति का स्थान प्रकाशितवाक्य 22:4, "और (वे) उसका मुँह देखेंगे।" कितनी प्रसन्नता की बात है !
7) सिद्ध स्वामित्व का स्थान, हम केवल उसी के होंगे। प्रकाशितवाक्य 22:4, "और उसका नाम उनके माथों पर लिखा हुआ होगा।" स्वामीभक्ति विभक्त नहीं होगी। सब उसका ही होगा, केवल उसी का।
8) सिद्ध महिमा का स्थान, प्रकाशितवाक्य 22:5, वहाँ कोई कृत्रिम प्रकाश नहीं होगा। वे साथ मिलकर युगानुयुग राज्य करेंगे।
सारांश
क्या आप स्वर्ग जाना चाहते हैं? क्या आपने तैयारी कर ली है? स्वर्ग तैयार लोगों के लिए है। एक अविश्वासी स्वर्ग में बहुत अधिक असुविधा अनुभव करेगा क्योंकि वह पवित्र स्थान है।
कहानी: एक राजा ने अपने विदूषक को एक टहलते समय ले जाने की छड़ी प्रदान की, यह छड़ी उसके प्रति सम्मान प्रकट करने को इसलिए दी गई थी कि वह सबसे बड़ा मूर्ख था। यह छड़ी केवल सबसे बड़े मूर्ख को ही दी जाती थी। एक दिन राजा जब मरने पर था तो विदूषक उसके पास आया, उसने राजा से पूछा कि उसने स्वर्ग जाने के लिए क्या तैयारी की है? "कुछ नहीं"। तब विदूषक ने वही छड़ी आदरपूर्वक राजा को देते हुए कहा, "तब तो आप ही सबसे बड़े मूर्ख हैं।"
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