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प्रभु परमेश्वर का भय
प्रस्तावना
यह एक ऐसा विषय है जो पिछले कई वर्षों से मुझे आकर्षित किए हुए परन्तु मैं कभी भी इस अति महत्वपूर्ण विषय पर बाइबल - अध्ययन पूरा नहीं कर पाया। ऐसा प्रतीत होता है कि दो प्रकार के भय है - गलत प्रकार का भय और सही प्रकार का भय।
बाइबल के बहुमूल्य संदेशों में से एक है, "डरो मत" जो लगभग 50 बार प्रयोग किया गया है: उत्पत्ति 15:1; उत्पत्ति 26:24; निर्गमन 14:13; यशायाह 43:1; लूका 2:10; लूका 12:32; प्रेरितों 27:24; प्रकाशितवाक्य 1:17 इसके अलावा इससे मिलते - जुलते अनेक वाक्यांश हैं जैसे यीशु के शब्द मैं हूँ "डरो मत" ( यूहन्ना 6:20 )। परन्तु यह पाठ दूसरे प्रकार के भय के बारे में है - परमेश्वर का भय जो हमारे अन्दर अवश्य होना चाहिए। अय्यूब 28:28, तब उसने मनुष्य से कहा, देख,
"प्रभु का भय मानना यही बुद्धि है।" भजन. 19:9, " यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है। " 2 शमूएल 23:3," मनुष्यों में प्रभुत्ता करने वाला एक धर्मी होगा, जो परमेश्वर का भय मानता हुआ प्रभुता करेगा।" इस भय का अभाव या अनुपस्थिति केवल पाप, भ्रम और अन्त में विनाश ही ला सकता है। उत्पत्ति 20:11, इब्राहिम ने इसलिए पाप किया क्योंकि,
" मैंने यह सोचा था, कि इस स्थान में परमेश्वर का कुछ भी भय न होगा। "उसने गलती से यह सोचा कि वह परमेश्वर के भय से परे और वास्तव में उससे मुक्त है।
रोमियों 3:18" उनकी आँखों के सामने परमेश्वर का भय नहीं।" बहुत ही भ्रष्ट व्यक्ति का एक चित्र।
1. “ प्रभु का भय " या "परमेश्वर का भय " का अर्थ ( नीतिवचन 14
: 26,27 ) क्या इसका अर्थ शारीरिक भय से है जब आप सर्वशक्तिमान की उपस्थिति में खड़े होते और कांपते हैं ?
डॉ . सी . आई . स्कोफील्ड इसका अर्थ यह बताते हैं बुराई के प्रति घृणा के साथ श्रद्धायुक्त भरोसा,
" ही परमेश्वर का भय है । प्रभु के भय का अर्थ है धार्मिक निष्ठा। यह परमेश्वर के प्रति अपने धार्मिक कर्तव्य की व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है।
व्यवस्थाविवरण 4:10,
"उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊँ, जिससे वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें। "इससे हम देखते हैं कि यह आवश्यक तो है परन्तु यह हमें अपने माता - पिता से पैतृक उत्तराधिकार में नहीं मिलता। बच्चों और बड़ों को यह भय सिखाए जाने की आवश्यकता है जिससे प्रत्येक पीढ़ी परमेश्वर का भय मानना सीख जाए।
परमेश्वर चाहता है कि हम सभी उसका भय मानें। सृष्टि की रचना का यह एक उद्देश्य है। व्यवस्थाविवरण 6:13,
"अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना ; उसी की सेवा करना।" सभोपदेशक 12:13, "अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान।"
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2. वस्तुएँ जिनसे हमें डरने की आवश्यकता नहीं
हमें मूर्तियों और अन्य देवी - देवताओं से भयभीत नहीं होना है। 2 राजा 17:38,
“ और जो वाचा मैंने तुम्हारे साथ बांधी है, उसे न भूलना और पराए देवताओं का भय न मानना। "हमें मनुष्य से नहीं डरना चाहिए। 1 शमूएल 15:24
. शाऊल की गलती, "मैंने तो अपनी प्रजा के लोगों का भय मानकर।" नीतिवचन 29:25,
" मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है।" - हमें तो केवल प्रभु से डरना है।
हमें सांसारिक आपदाओं और विपत्तियों से नहीं डरना है क्योंकि वे हमारे उद्धारकर्ता की शीघ्र वापसी का संकेत है। लूका 21
: 25-28 , "भय के कारण लोगों के जी में जी न रहेगा तो सीधे होकर अपने सिर ऊपर उठाना।"
सच्चा विश्वासी भविष्य के दण्डों से नहीं घबराता। इब्रानियों 10:27,
" दण्ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा।"
"हमें भय " से नहीं डरना है , अय्यूब 15:24,
“संकट और दुर्घटना से उसको ( अविश्वासी को ) डर लगता रहता है," परन्तु विश्वासी अपने सारे सांसारिक डर प्रभु पर डाल देता है। 1 पतरस 5 :
7, “अपनी सारी चिन्ता ( परेशानियाँ और डर ) उसी पर डाल दो /। " केवल एक डर बाकी बचता है और वह है प्रभु परमेश्वर का पवित्र भय।
3. परमेश्वर के भय की आज्ञा दी गई है
व्यवस्थाविवरण 13
: 4, “तुम अपने परमेश्वर यहोवा के पीछे चलना, और उसका भय मानना, और उसकी आज्ञाओं पर चलना, और उसका वचन मानना, और उनकी सेवा करना, और उसी से लिपटे रहना।
1 पतरस 2:17,
“सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो। "भजन ० 22:23,
"हे यहोवा के डरवैयो उसकी स्तुति करो उसकी महिमा करो उसका भय मानो!"
पृथ्वी पर शिष्यों ने इस विषय में एक बहुत ही गौरवशाली उदाहरण रखा प्रेरितों 9:31,
" वह ( कलीसिया ) प्रभु के भय और पवित्र आत्मा की शान्ति में चलती और बढ़ती जाती थी। " कुरनेलियुस एक ऐसा मनुष्य था जो परमेश्वर से डरता था।
प्रेरितों 10
: 2 , " वह भक्त था, और अपने सारे घराने समेत परमेश्वर से डरता था। "कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर ने कुरनेलियुस के पास सुसमाचार भेजा। 2कुरिन्थियों 7 :1, परमेश्वर का भय हमें चौकस जीवन जीना सिखाता है, "तो आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय रखते हुए पवित्रता को सिद्ध करें। "यह ईश्वरीय भय हमारे जीवनों के लिए एक प्रभावशाली प्रेरणादायक शक्ति का कार्य करता है।
4. परमेश्वर के भय का चित्रण
1 ) यह बुराई से घृणा है। नीतिवचन 8:13,
"यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है।"
2 ) यह बुद्धि है । भजन ० 111:10, "बुद्धि का मूल यहोवा का भय है।"
3 ) यह खजाना है। नीतिवचन 15:16,
" घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है।" यशायाह 33:6 "यहोवा का भय उसका ( विश्वासी का ) धन होगा।"
4 ) यह जीवन का सोता है। नीतिवचन 14:27, यहोवा का भय मानना जीवन का सोता है।"
5 ) यह पवित्र है । भजन ० 19
: 9. " यहोवा का भय पवित्र है। " यह शुद्ध करता है।
6 ) यह अनन्तकाल तक बना रहता है भजन ० 19
: 9, "वह ( यहोवा का भय अनन्तकाल तक स्थिर रहता है।"
7 ) यह ईश्वरीय है। इब्रानियों 12:28,
"उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिसके द्वारा हम भक्ति और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिससे वह प्रसन्न होता है।" भक्ति और भय में अन्तर है।
5. कौन सी प्रेरणा हमें परमेश्वर से डरने के लिए प्रेरित करती है ?
1 ) परमेश्वर की पवित्रता हमें उससे डरने के लिए प्रेरित करती है। प्रकाशितवाक्य 15:4,
"हे प्रभु कौन तुझसे न डरेगा ? और तेरे नाम की महिमा न करेगा ? क्योंकि केवल तू ही पवित्र है।"
2 ) परमेश्वर की महानता हमें उससे डरने के लिए प्रेरित करती है। व्यवस्थाविवरण 10:12,17, "और अब हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझसे इसके सिवाय और क्या चाहता है कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय माने क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है , वह महान पराक्रमी और भययोग्य ईश्वर है।"
3 ) परमेश्वर की अच्छाई हमें उससे डरने के लिए प्रेरित करती है। 1 शमूएल 12:24,
“ केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मन के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिए कैसे बड़े - बड़े काम किए हैं।"
4 ) परमेश्वर की क्षमा हमें उससे डरने के लिए प्रेरित करती है। भजन 130:4, "परन्तु तू क्षमा करने वाला है, जिससे तेरा भय माना जाए।" इसके लिए भी प्रभु का धन्यवाद हो।
5 ) परमेश्वर के आश्चर्यजनक कार्य हमें उससे डरने के लिए प्रेरित करते हैं। यहोशू 4:23.24, यहोशू इन कार्यों पर विचार करता है।
6 ) आने वाला न्याय हमें परमेश्वर से डरने के लिए प्रेरित करता है । प्रकाशितवाक्य 14:7, "और उसने बड़े शब्द से कहा; परमेश्वर से डरो; और उसकी महिमा करो; क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुंचा है।"
6. परमेश्वर का भय आवश्यक है
1 ) यह आराधना के लिए आवश्यक है। भजन 5:7, “ मैं तेरा भय मान कर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत् करूँगा देखें " भजन 5:7
2 ) यह सेवा के लिए आवश्यक है। भजन ० 2:11, "डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।"
3 ) यह पाप से हमारी रक्षा करने के लिए आवश्यक है। निर्गमन 20:20
" डरो मत; क्योंकि परमेश्वर इस निमित्त आया है कि तुम्हारी परीक्षा करे, और उसका भय तुम्हारे मन में बना रहे, कि तुम पाप न करो।"
4 ) यह अच्छे शासन के लिए आवश्यक है। 2शमूएल 23:3,
"मनुष्यों में प्रभुत्ता करने वाला एक धर्मी होगा, जो परमेश्वर का भय मानता हुआ प्रभुता करेगा। " यह बात आजकल की सरकारों में देखने को नहीं मिलती।
5 ) यह न्याय करने के लिए आवश्यक है; 2इतिहास 19:6-9
6 ) यह हमारे मसीही जीवनों को पवित्रता में सिद्ध करने के लिए आवश्यक है; 2कुरिन्थियों 7:1
7. परमेश्वर के भय के परिणाम
1 ) इससे परमेश्वर को प्रसन्नता होती है। भजन ० 147:11,
“यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात उनसे जो उसकी करुणा की आशा लगाए रहते हैं। "आइए, प्रभु को और अधिक प्रसन्न रखें।
2) यह परमेश्वर की सन्तान पर परमेश्वर की करुणा को और अधिक बढ़ाता है। भजन० 103:13,
"जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।"
3 ) इसके कारण परमेश्वर लोगों को स्वीकार करता है। प्रेरितों के काम 10:35,
"हर जाति में जो उससे डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है। "पतरस से लेकर कुरनेलियुस और मित्रों तक।
4 ) इसके कारण परमेश्वर की करुणा मिलती है। भजन ० 103:17,
“यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग - युग होती रहती है। हे प्रभु मुझे अपना भय मानना सिखा ( लूका 1:50
)।
5 ) इसके कारण आशिर्षे प्राप्त होती है। भजन ० 112:1,
"क्या ही धन्य है वह पुरुष जो. यहोवा का भय मानता है।"
6 ) इससे आत्मविश्वास प्राप्त होता है। नीतिवचन 14:26,
"यहोवा के भय मानने से दृढ़ भरोसा होता है।"
7 ) इसके कारण पाप से अलगाव होता है। नीतिवचन 16:6,
"यहोवा के भय मानने के द्वारा मनुष्य बुराई करने से बच जाते हैं। "आजकल परमेश्वर का भय बहुत कम है और बुराई की भरमार है।
8 ) यह मसीही संगति लाता है। मलाकी 3:16,
"तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धरकर उनकी सुनता था।"
9 ) यह मनुष्य से डर को हटाता है। यशायाह 8:12,13,
"जिस बात से वे डरते हैं उससे तुम न डरना और न भय खाना। सेनाओं के यहोवा ही को पवित्र जानन ; उसी का डर मानना और उसी का भय रखना।
10 ) इससे प्रार्थना का उत्तर मिलता है। भजन ० 145:19,
"वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है और उनकी दोहाई सुनकर उनका उद्धार करता है।
11 ) यह लम्बी आयु लाता है। नीतिवचन 10:27,
“यहोवा के भय मानने से आयु बढ़ती है।
सारांश
आइए, प्रार्थना करें कि परमेश्वर हमें अपना भय मानना सिखाए। भजन 86
;11, "हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझको एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। " देखिए नीतिवचन 15:16 नीतिवचन 19:23
पुनर्विचार के लिए प्रश्न
1. "परमेश्वर के भय" का अर्थ बताइए।
2. व्यवस्थाविवरण 4:10 से हम परमेश्वर से डरने के विषय में क्या शिक्षा प्राप्त करते हैं ?
3. सभोपदेशक 12:13 के अनुसार मनुष्य के दो उद्देश्य क्या हैं ?
4. वे कौन सी चार बातें हैं जिनसे हमें नहीं डरना चाहिए ?
5. बाइबल से दो संदर्भ देकर ( एक पुराने नियम से और एक नए नियम से ) यह सिद्ध कीजिए कि हमें परमेश्वर से डरना है।
6. परमेश्वर का भय कैसा है , इस विषय में सात बातें बताइए।
7. पाँच बातें बताइए जो हमें परमेश्वर से डरने के लिए प्रेरित करती है।
8. परमेश्वर का भय क्यों आवश्यक है?
9. परमेश्वर से डरने के दस परिणाम बताइए।
10. भजन . 86:11 से हम क्या सीखते हैं?
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